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व्लादिमीर पुतिन: वो राष्ट्रपति जिसने स्कूल में ‘मिलिट्री’ लगाकर, ‘आतंकियों’ को चौंका दिया था!
नवम्बर 12, 2020 | By - Vaibhav Sharma

व्लादिमीर पुतिन: वो राष्ट्रपति जिसने स्कूल में ‘मिलिट्री’ लगाकर, ‘आतंकियों’ को चौंका दिया था!

रुसी राष्ट्रपति ‘व्लादिमीर पुतिन’ एक बार फिर चर्चा में है। लेकिन इस बार वे अपनी निजी समस्या को लेकर चर्चा में आए हैं। एक किंवदन्ती के अनुसार, देश की जनता के बीच ‘अमर’ कहलाए जाने वाले पुतिन एक गंभीर बिमारी से ग्रस्त बताए गए हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे इस बीमारी के चलते अगले साल राष्ट्रपति पद से इस्तीफा भी दे सकते हैं। लेकिन, हर परिस्थिति से निपट लेने वाले पुतिन की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। केवल कयास लगाए गए हैं कि, पुतिन की 37 साल की गर्लफ्रेंड एलिना काबेवा और उनकी दो बेटियां मारिया वोर्त्सोवा(35) और कतेरीना तिखोनोवा(34) राष्ट्रपति का पद छोड़ने के लिए उनपर दबाव बना रही हैं। दुनिया की महाशक्तियों में से एक रूस जैसे देश की सत्ता को लगभग 20 साल से भी अधिक समय से संभालने वाले पुतिन ‘पार्किंसंस’ बीमारी से पीड़ित हैं।

आखिर ये कौनसी बीमारी है जो शक्तिशाली पुतिन को इस्तीफा देने पर मजबूर कर देगी?

क्या है वो बीमारी जिसने पुतिन को किया परेशान?

पार्किंसंस रोग, कई लोगों के लिए यह नाम बेहद नया हो लेकिन आज के बाद वे इससे भली-भांति परिचित होंगे। यह एक मानसिक रोग है, जिसमें मानव शरीर में कंपकंपी, कठोरता, चलने में परेशानी होना, संतुलन और तालमेल जैसी समस्याएं होती हैं। पार्किंसंस रोग की शुरुआत सामान्य बीमारी की तरह होती है, जो कुछ समय बाद गंभीर रूप ले लेती है। इसके लक्षण या संकेत अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकते हैं। पार्किंसन किसी भी व्यक्ति के सोने की क्षमता को बाधित कर सकता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि महाशक्ति रूस की सत्ता के मुखिया कैसे इस बीमारी से खुद को निकालेंगे या वास्तविकता में इससे पुतिन ‘राजनैतिक हाशिए’ पर चले जाएंगे।

पुतिन के बारे में वो सब जो आप जानकर चौकेंगे जरूर!

व्लादिमीर पुतिन, गूगल पर टाइप करते ही आपको ढेरों इमेज मिलेंगीं, जो आपको पुतिन का प्रशंसक बनाने के लिए काफी है। एक ऐसा नाम, जो रूस का पर्याय है, इनके बारे में काफी अफवाहें हैं, कुछ किंवदंतियां भी हैं, जिनके अनुसार, पुतिन डेढ़ सौ साल से जिंदा है! वे रूस की रक्षा कर रहे हैं। सोवियत यूनियन के टूटने के बाद पुतिन से बड़ा नेता रूस में नहीं हुआ। एक और बात, दुनिया में जितने लोग अमेरिका से चिढ़ते हैं, पुतिन में वे अपना हीरो ढूंढते हैं।

स्थान-सेंट पीटर्सबर्ग

समय- 18वीं शताब्दी 

दिनांक- 7 अक्टूबर 1952

व्लादिमीर पुतिन को बचपन से ही फिल्मों का शौक रहा है। वे फ़िल्में देखते थे, देशभक्ति से जुड़ी सेना से जुड़ी। यही जज्बा उनके काम आया और उन्होंने सेना से जुड़ने का फैसला लिया। नियति ने उन्हें रूस की खुफिया एजेंसी ‘केजीबी’ के लिए चुना। वक्त के साथ, वे लेफ्टिनेंट कर्नल की पोस्ट तक पहुंच गए। उधर 1990 आते-आते सोवियत यूनियन टूटने लगा। 1991 में उसके छोटे-छोटे टुकड़े हो गए और कई देश अलग-थलग हो गए। उस वक्त के राष्ट्रपति ‘मिखाइल गोर्बाचोव’ पर बड़े आरोप लगे। यही वो वक्त था, जब रूस में निराशा फैली थी और इन्हीं हालातों में पुतिन नौकरी छोड़ राजनीति में आ गए। ठीक 8 साल बाद 1999 में रूस के प्रेसिडेंट ‘बोरिस येल्तसिन’ को इस्तीफा देना पड़ा। ऐसे में गद्दी संभालने को लेकर सवाल खड़े हुए, रिपोर्ट के अनुसार, बोरिस के समर्थकों को पुतिन ने अपनी तरफ कर लिया। फिर रूस में शुरू हुआ ‘पुतिन राज्य’ जो आजतक वर्तमान में चला आ रहा है।

पुतिन कभी हार नहीं मानते!

एक कहावत है, सफलता अपने साथ शत्रुओं को भी लेकर आती है। ठीक ऐसा ही हुआ, पुतिन को हार न मानने वाला राष्ट्रपति कहा जाता है। भूतकाल के गर्भ में कई ऐसी वास्तविकताएं दर्ज हैं जो इस बात की गवाही देती हैं, कि पुतिन को झुकाना नामुमकिन है।

चेचन्या में दूसरा ‘चेचेन वॉर’ शुरू हुआ, रूस पर फिर से टूटने का खतरा मंडरा रहा था। ऐसे समय में पुतिन ने बेहद कड़ा फैसला लिया। आतंकियों को सबक सिखाने के लिए उनके इस फैसले की वैश्विक नेताओं ने काफी आलोचना भी की। 2004 में चेचेन्या के आतंकवादियों ने बेसलान के एक स्कूल में बच्चों को बंधक बना लिया था।  पुतिन ने सख्त रवैया अपनाया, उनसे किसी भी तरह की बात नहीं की। सीधे सेना को जवाबदेही सौंपी और नतीजा, 126 बच्चों की मौत। इस घटना से पुतिन ने आलोचना झेली लेकिन आतंकवादियों में ऐसा डर बैठा कि वे पुतिन के नाम से कांपने लगे। यहां से पुतिन का दर्जा बढ़ता गया और रुसी जनता का विश्वास भी।

‘अलेक्सेई नवालनी’ ताजा उदहारण हैं, जिन्होंने पुतिन पर जहर देकर मारने का आरोप लगाया था। इससे पहले 2006 में रूस से भागे जासूस ‘अलेक्जेंडर लिटिवेंको’ को ब्रिटेन में जहर दे दिया गया। वे पुतिन के खिलाफ थे, आरोप तब भी लगे और बात वहीं दबा दी गई।

रूस के भाईलोगों की भाषा ‘फेन्या’ बोल लेते हैं पुतिन

भारत देश में एक जगह है मुंबई जहां के भाई लोग वहां की ठेठ मुम्बइया भाषा बोलते हैं, ताकि अपना रुतबा कायम कर सके। पुतिन भी रूस की भाईलोगों वाली भाषा बोलते नजर आ जाते हैं। यह ‘फेन्या’ भाषा है, जिसे जेल में बंद कैदियों द्वारा बोला जाता था। कहा जाता है, सेना में रहने के दौरान पुतिन ने यह भाषा सीखी थी। वे कभी-कभी फेन्या बोलते हैं, जो वहां की मुम्बइया भाषा है। यही नहीं, यह राष्ट्रपति मिलिट्री जेट उड़ाते हैं, मॉर्शल आर्ट, घुड़सवारी, राफ्टिंग, फिशिंग, और कई रोमांचक खेलों के शौक़ीन हैं।

समर्थकों ने बनाया हीरो

पुतिन समर्थक केवल रूस में ही नहीं बल्कि बाहरी देशों में भी हैं। पुतिन के बीमार होने की सूचना आते ही कई समर्थक सकते में हैं। उन्होंने पुतिन को एक हीरो की तरह देखा है। वे अपने नेता को ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे। उनकी इमेज सुपरहीरो की तरह हैं, उनपर बने गाने ‘बी लाइक’ पुतिन और ‘टफ गाय’ समर्थकों और सोशल मीडिया पर काफी फेमस हैं। अब वर्तमान में जब पुतिन की खबर आई है तो इसपर मुहर तब ही लग पाएगी जब खुद पुतिन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आ जाता है। हालांकि इसे महज अफवाह करार भी नहीं दिया जा सकता जबकि इसका वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर मौजूद है।

 

 

Source: Putin: Story of the life

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