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आखिर क्या है ब्लैक फंगस जिससे कोरोना मरीजों के लिए बढ़ गया मौत का खतरा
मई 11, 2021 | By - Abhishek Pandey

आखिर क्या है ब्लैक फंगस जिससे कोरोना मरीजों के लिए बढ़ गया मौत का खतरा

भारत में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच जहां ऑक्सीजन की किल्लत के चलते कई लोगों ने अपनी जान को गंवा दिया तो वहीं अब कोरोना संक्रमण से ठीक हो रहे मरीजों में म्यूकरमायकोसिस (ब्लैक फंगस या काली फफूंद) की समस्या देखने को मिल रही है। अभी तक देश में इस बीमारी के लक्षण महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा में सामने आए हैं।

पुणे में हर दिन औसतन कम से कम दो या तीन मरीज ऐसे सामने आ रहे हैं जिनका डॉक्टर ब्लैक फंगस के लिए इलाज कर रहे हैं। इस बीमारी में में कुछ गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए उनकी आंखें निकालनी पड़ती है। ब्लैक फंगस’ (Black Fungus) या म्यूकोरमाइकोसिस (Mucomycosis) नाक से शुरू होती है फिर आंखों से लेकर दिमाग तक फैल जाती है। अभी तक मुंबई के बीएमसी के बड़े अस्पताल सायन में पिछले 2 महीने के अंदर में ब्लैक फंगस के लगभग 30 मरीज सामने आ चुके हैं।

कैसे पनपता है ब्लैक फंगस

म्यूकरमायकोसिस म्यूकर फंगस या ब्लैक फंगस एक दुर्लभ संक्रमण है, जो मिट्टी, फल-सब्जियों के सड़ने की जगह, खाद बनने वाली जगह पर पनपता है। इस फंगस की मौजूदगी मिट्टी और हवा दोनों जगह हो सकती है। इंसान की नाक और बलगम में भी ये पाया जाता है। ब्लैक फंगस में मृत्यु दर 50 से 60 फीसदी तक होती है। कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में स्टीरॉयड्स के इस्तेमाल की वजह से ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं।

आखिर क्या हैं लक्षण

ब्लैक फंगस के लक्षणों को लेकर बात की जाए तो यह नाक से शुरू होकर दिमाग तक फैल जाता है। जिसमें नाक में खुजली से शुरू होने के बाद धीरे-धीरे आंख में फैलता है और फिर आंख में सूजन होती है, जिससे कम दिखने लगता है। यदि इसके बाद दिमाग तक यह फंगस पहुंच जाता है, तो ऐसी स्थिति में मौत का खतरा 80 फीसदी तक बढ़ जाता है।

यह फंगस 2 से 3 दिन तक नाक में रहने के बाद आंख पर अपना असर दिखाना शुरू करता है ऐसे में नाक से खून निकलना या देखने में हल्की दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। कोरोना संक्रमित मरीज में यदि यह फंगस सामने आता है तो उसके लिए उपचार और भी कठिन हो जाता है।

कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के लिए खतरा दुगना

कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों में ब्लैक फंगस का खतरा दुगना देखने को मिलता है। खासकरके डायबिटीज या जो मरीज ऑर्गन ट्रांसप्लांट से गुजरे हों। फंगस नमी में रासायनिक बदलाव करता है, जब इम्युनिटी कम होती है और खून की सप्लाई कम होती है तो उससे इस संक्रमण का प्रसार बहुत तेजी से होता है। विशेषज्ञों को अनुसार शुगर लेवल का अधिक होना और स्टीरॉयड्स का ज्यादा इस्तेमाल ब्लैक फंगस संक्रमण को न्योता देने जैसा है।

इलाज में आता अधिक खर्च

म्यूकरमायकोसिस से पीड़ित मरीज का इलाज करवाना भी महंगा है। इस फंगस के इलाज में प्रत्येक दिन लगने वाले एक इंजेक्शन की औसतन कीमत 7,000 से 8,000 रुपए के करीब है। इसके अलावा नियमित ब्लड टेस्ट होते हैं। वहीं शरीर का सुगर लेवल भी दिन में 3 से 4 बार चेक किया जाता है और लगभग 4 बार इंसुलिन की डोज दी जाती है। इस फंगस से मरीज के रिकवर होने की प्रक्रिया भी बेहद लंबी है।

ICMR ने भी जारी की चेतावनी

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने ब्लैक फंगस को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यह कोरोना मरीजों में पाया जा रहा है और इससे ठीक हो चुके मरीजों के लिए म्यूकोरमाइकोसिस जानलेवा साबित हो रहा है। ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस वातावरण में मौजूद रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर देता है । जिससे सही समय पर इलाज ना मिलने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।

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