जानें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है!
जनवरी 20, 2021 | By - Gaurav Sen

जानें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है!

टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव से आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस आज दुनियाभर में एक बड़ा बहस का विषय बन गई है। जहां एक धड़ा, इसे मानव जीवन के लिए सहूलियत बता रहा है वहीं दूसरा धड़ा इसे लेकर काफी समय से चेतावनी भी देता आया है। खतरा! और वो भी टेक्नोलॉजी से…! जो आज के समय में मनुष्य का सबसे करीबी दोस्त बन कर उभरी है। जी हां, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, हमने बचपन में भी सुना है जहां सुविधा है वहां दुविधा भी है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि हम वर्तमान की सहूलियत में भविष्य के नुकसान को नकारते जा रहे हैं। इसी से जुड़ा है आज का मुद्दा जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में आपके हर सवाल का जवाब देगा। आज अलशॉर्ट्स आपके लिए ‘एआई’ से जुड़ी वह जानकारी लाया है जिसके बाद आप इस नई दुनिया की टेक्नोलॉजी का सारा कच्चा-चिट्ठा जान पाएंगे।

टेक्नोलॉजी ने वाकई में हमें नई दुनिया के बराबर चलने का एक हुनर दिया है। जहां पहले बाइनरी भाषा समझने वाले कंप्यूटर हमारे लिए एक जादुई वस्तु हुआ करती थी उसके बाद हमने सुपर कप्यूटर का नाम सुना तो इसे ही जीवन का एक आधार मान लिया। समय के साथ जमाना बदला और धीरे-धीरे चीन, जापान और अमेरिका जैसे देशों ने रोबोट बनाने की घोषणा की। अब इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहां आया? सरलतम शब्दों में कहें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है एक मशीन में सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कंप्यूटर साइंस का सबसे उन्नत रूप माना जाता है और इसमें एक ऐसा दिमाग बनाया जाता है, जिसमें कंप्यूटर को सोचने की शक्ति दी गई। यहां कंप्यूटर का ऐसा दिमाग ईजाद किया गया जो इंसानों की तरह सोच सके। यही एआई है जिसे लेकर आज वैज्ञानिक समाज दो धड़ों में बंटा गया है। कुछ मानते हैं कि भविष्य की नीतियों को समझने के लिए वाकई में एआई का सहारा लेना आवश्यक है। वहीं दूसरे यह मानते हैं कि एक क्षेत्र विशेष को छोड़ कर एआई का इस्तेमाल मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।


 

एआई पर क्या कहते हैं टेस्ला के सीईओ एलन मस्क?

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार टेस्ला मोटर्स और स्पेस एक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में अपनी निष्पक्ष राय रखते हैं। वाकई में यह उनके बेबाक होने का प्रमाण है। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि एआई आधारित ऑटोमोबाइल कंपनी के मालिक इस तकनीक के पक्ष में नहीं है। जिसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव जीवन के लिए खतरा है। सुविधा के लिए पूर्ण रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निर्भरता गंभीर परिणाम दे सकती है। लोगों की नौकरियां खतरे में आ सकती हैं, एक ही जैसे तरीके के वाली नौकरियां खत्म हो जाएंगी और लोग बेरोजगार हो जाएंगे।’ हालांकि, दिसंबर 2015 में उन्होंने गैर लाभकारी कंपनी ‘ओपन एआई’ की स्थापना की है। इस कंपनी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसानों के लिए फायदेमंद बनाने और उससे उठने वाले जोखिम को खत्म करने का है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के हावी होने पर उससे बचने के लिए साल 2017 में उन्होंने न्यरोलिंक नाम से एक कंपनी की भी स्थापना की है । जिसका मकसद ऐसी तकनीक का अविष्कार करना है, जिससे इंसानों के लिए एआई के खिलाफ जंग में सहायता मिल सके।

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को उत्तर कोरिया से भी खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप एआई सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं है तो आपको होना चाहिए।‘

रूस में AI इंस्टीट्यूट की बनाने की तैयारी

तकनीक की दुनिया में आर्टिफिशिय़ल पर तेजी से काम हो रहा है। जिसमें रूस ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए रूस के मास्को में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस्टीट्यूट बनाए जाने की घोषणा की है। जहां एआई की महत्वता को समझने और इसके उपयोग पर रिसर्च किया जाएगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि ‘एआई मानवता के अगले कदम के लिए नींव साबित होगी, इसके जरिए असंभव लगने वाली तकनीक और आविष्कार कर पाना संभव हो जाएगा। मास्को में 3 से 5 दिसंबर तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्फ्रेंस (Artificial Intelligence Journey 2020) का आयोजन किया गया था। इसमें पूरी दुनिया से इंडस्ट्री और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स से जुड़े 101 देशों के 29000 विशेषज्ञों ने भाग लिया था। इस दौरान 200 से ज्यादा साइंटिस्ट्स, रिसर्चर और टॉप मैनेजरों भी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे। इस कॉन्फ्रेंस के आयोजक श्बेर बैंक एग्जीक्यूटिव बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन अलेक्सान्द्र वेद्याखिन ने कहा कि साल 2021 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नए आविष्कारों का नया दौर शुरू होगा।


 

आपके कम्प्यूटर से भी इंटेलिजेंट होगा सऊदी अरब का ‘NEOM’

कार्बन उत्सर्जन, जलवायु परिवर्तन के होने वाले खतरों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब प्रिंस एचएच मोहम्मद बिन सलमान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेस शहर बनाने जा रहा हैं। एक ऐसा शहर बसाया जा रहा है जिसमें कोई भी कार या सड़क नहीं होगी, इस नए शहर में शून्य कार्बन उत्सर्जन होगा। प्रिंस ने NEOM प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले इस शहर THE LINE के बारे में बताया है कि करीब 170 किलोमीटर की लंबाई में यह शहर बसाया जाएगा। तेल समृद्ध देश सऊदी अरब अपने लिए बिना तेल का भविष्य तैयार करने जा रहा है । इस शहर का निर्माण इस साल की पहली तिमाही में शुरू हो किया जाएगा। यह शहर लाल सागर के तट पर विकसित किया जा रहा है।

नियोम शहर में एक उच्च गति वाला सार्वजनिक परिवहन सिस्टम खड़ा किया जाएगा। इस शहर को विकसित करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह 100 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा द्वारा संचालित होगा और यहां निवासियों के लिए प्रदूषण मुक्त, स्वास्थ्य और अधिक स्थायी वातावरण मुहैया कराया जाएगा।


 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जमकर भुना रहा चीन

चीन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में सस्ती और टिकाऊ तकनीक वाली वस्तुओं के नाम आने लगते हैं। कम आय वाले लोगों की पहुंच तक मोबाइल फोन को पहुंचाने के लिए भी चीन का नाम सबसे आगे आता है। इसी के साथ अब चीन में आर्टफिशियल इंटेलिजेंस का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। स्मार्टफोन में फेसियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया गया है जिससे मोबाइल फोन का लॉक खोल सकते हैं। खरीददारी करते समय फेसियल रिकॉग्निशन से भुगतान किया जा सकता है। यात्रा करते समय इससे ट्रेन में सवार हो सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार चीन में फेसियल रिकॉग्निशन से संबंधित उद्यमों की संख्या 10 हजार से अधिक है। अनुमान है कि वर्ष 2024 तक इसका बाजार 10 अरब युआन (करीब 100 अरब रुपए) से अधिक होगा।

विश्वभर में चीन में निर्मित इलेक्ट्रीकल खिलौनों की मांग जमकर होती है। इसी के साथ वहां की खिलौना कंपनियां एआई तकनीक का उपयोग कर बच्चों के लिए स्पेशल खिलौने बना रही हैं, जो बच्चों से बात करते हैं उन्हों कहानियां सुनाते हैं, उनके सवालों के जबाव देते हैं। वहां के होटलों को एआई संचालित रोबोट लोगों से आर्डर लेने से लेकर खाना परोसने तक का काम कर रहे हैं।


 

एआई तकनीक में जापान का नाम आना लाजमी है!

नए अविष्कार की बात हो और जापान का नाम ना आए यह बात गले नहीं उतरती। जापान ने अपने एआई सिस्टम को मजबूत करने के लिए नए आयामों को छुआ है। हाल ही में जापान एक ऐसे टॉयलेट को लेकर सुर्खियों में था जो इस्तेमाल करने के बाद खुद-ब-खुद साफ हो जाते हैं। बात रोबोटिक्स पर करें तो जापान इसमें अव्वल दर्जे के रोबोट्स बनाता है जो होटलों में सर्विस देने से लेकर लोगों को जीवनसाथी चुनने में मदद कर रहे हैं।  जापान तकनीक के मामले में इतना सुदृढ़ है कि यहां पर फिल्मे में काम करने के लिए रोबोट को भारी-भरकम रकम दी जा रही है। जी हां, जापान में साल 2020 में केवल एआई आधारित फिल्म बनाने की घोषणा की गई है। इस फिल्म के लिए 70 करोड़ का बजट रखा गया है और इसमें काम करने वाले रोबोट को सात करोड़ डॉलर दिए जाएंगे, फिल्म का नाम B रखा गया है। जापान के योकोहामा शहर में स्थित Gundam फैक्ट्री ने विशालकाय रोबोट बनाया गया है। जापानी कंपनी गुंडम ने अपने इस रोबोट का नाम RX-78 रखा है। इस रोबोट की ऊंचाई 60 फीट और वजन करीब 25 टन के आसपास है। आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि यह रोबोट कितना विशाल है। इस रोबोट की निर्माण करने वाली कंपनी गुंडम फैक्ट्री डॉट नेट ने बताया कि दुनियाभर से जानकारी इकट्ठा कर इसका निर्माण कराया गया है।

सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की धमक

विश्वभर में कई देशों ने एआई तकनीक में अपने निवेश को कई गुना बड़ा दिया है। जिनमें भारत, अमेरिका, चीन, जापान, रूस सहित कई अन्य देश शामिल हैं। तेजी से शोध जारी हैं नई-नई तकनीकों को ईजाद किया जा रहा है और बेहतर भविष्य के लिए एआई सामर्थ्य को परखा जा रहा है। यदि हम बात करें सेना में एआई तकनीक के उपयोग की तो यह सबसे बड़ा एआई का उपयोग कहा जा सकता है। क्योंकि सीमा पर तैनात सैनिकों को एआई की सहायता से काफी मदद मिल रही है इसके उपयोग पर व्यापक तौर काम किया जा रहा है। यदि हम एआई तकनीक के उपयोग की बात करें तो अमेरिका का उदाहरण हमारे सामने है। अमेरिका मानव रहित ड्रोन के सहारे अपने दुश्मनों के गुप्त ठिकानों को निशाना बनाता रहा है, यह मानवरहित ड्रोन आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की मदद से काम करते हैं। ऐसे में यह परियोजना देशों की थल सेना, वायु सेना और नौसेना को भविष्य की जंग के लिहाज से तैयार करने की व्यापक नीतिगत पहल का हिस्सा है। सेना के जवानों की शहीदी को कम से कम करने पर देशों में एआई तकनीक को बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। भारत सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रक्षा मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है।  इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए रक्षा मंत्रालय ने नेशनल सिक्योरिटी और रक्षा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को लेकर अध्ययन करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रिसर्च और इनोवेशन पर अध्ययन का काम शुरु किया गया है। बता दें कि टास्क फोर्स में सरकार के नेतृत्व के साथ रक्षा विभाग, अकादमिक, रक्षा उधोग, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, नेशनल साइबर सिक्योरिटी कॉर्डिनेशन, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और स्टार्ट-अप्स के सदस्य शामिल है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करता है आप की जासूसी

अभी तक हमने एआई के उपयोग से जुड़े अच्छे पहलुओं पर बात की है। अब हम बताते हैं कि एआई आपके लिए किस तरह से घातक साबित हो सकती है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को लेकर पूरे विश्व में चिंता जताई जा रही है। कई देशों में तो इस तकनीक पर रोक लगाने के अलग-अलग उपाय भी खोजे जा रहे हैं। कई देश ऐसे भी हैं जो इस तकनीक को विकसित कर जासूसी भी कर रहे हैं, जासूसी की इस दौड़ में चीन सबसे आगे है, यही वजह है कि भारत समेत कई देशों ने चीन के कई मोबाइल ऐप को अपने देशों में बैन कर दिया है। भारत ने चीन के जितने भी मोबाइल ऐप को बैन किया है ये सभी ऐप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरह ही काम करते थे। जो भी यूजर इन ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड करता था ये ऐप उस यूजर की जासूसी करना शुरू कर देते थे इसलिए भारत ने चीन के ऐसे सैकड़ों एप्स पर रोक लगा दी है। अमेरिका ने भी सैंकड़ों चीनी ऐप पर कैंची चलाते हुए उनके उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है।

क्या मशीन करेगी इंसानों पर राज?

मशीन आपका काम आसान करती है, आपका समय बचाती है, आपके काम को सही रूप प्रदान करती है। लेकिन क्या आपको लगता है कि मशीन इंसानों पर राज करेगी? इस सवाल का जवाब कुछ यूं समझिए की एक तरह के किए जाने वाले कामों में एआई तकनीक का इस्तेमाल घातक साबित हो सकता है। हम कार्यक्षेत्रों की बात करें तो जानिए की ड्राइवर के बिना चलते वाली गाड़ियां, ट्रेन बेरोजगारी पैदा कर रही हैं। गाड़ी में एआई तकनीक है तो ड्राइवर की जरूरत ही क्या? विश्व की कई ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां ड्रोन की सहायता से सामान डिलीवरी पर काम कर रही हैं। हाल ही में अमेजन द्वारा इसका ट्रायल भी किया गया, जिसमें ड्रोन में संबंधित व्यक्ति के पते को फीड किया गया और ड्रोन सामान लेकर उड़ गया। इस तरह से डिलीवरी करने वाले लोगों को नौकरियों पर संकट आना तय है। ऐसे ही कई सारे क्षेत्र में जहां एआई सीधे-सीधे रोजगार को बुरी तरह चोट पहुंचाएगी। लोगों के काम छिन जाएंगे क्योंकि उनकी जगह मशीन तेजी के साथ उनके कामों को करने लगेगी। कई लोगों के द्वारा किए जाने वाले कार्यों को मशीन तेजी से कम समय में करेगी।

हमें ध्यान रखना होगी स्टीफन हॉकिंग की ये समझाइश

दुनिया को ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत समझाने वाले जाने माने भौतिक वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने 2017 में कहा था कि ‘मैं मानता हूं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानवता की बेहतरी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इंसान को इस पर काबू करने का कोई न कोई रास्ता तलाशना पड़ेगा, उन्होंने ताकतवर मशीनों बनने की बात कहते हुए इनके अधिक ताकतवर बनने को लेकर आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि, ‘अगर हम इसके खतरों के लिए खुद को तैयार नहीं कर पाए तो इसके कारण मानव सभ्यता को सबसे बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।’

इस डर को समझदारी के साथ खत्म करने की जरूरत होगी। तकनीक का इस्तेमाल यूं करना होगी कि ‘सांप भी मारा जाए और लाठी भी न टूटे’। बीते कई सालों में तकनीक का विकास तेजी से किया जा रहा है। नित नए अविष्कार लोगों को सहूलियत देने के साथ ही इंसानों को लिए घाटे का सौदा न साबित हों इस पर विचार करना होगा। विश्व के अग्रणी देशों के बीच प्रमुख शक्ति बनने की दौड़ भी मानव सभ्यता के लिए घातक साबित हो सकती है। देशों को ध्यान रखना होगा कि मशीनों पर इंसानी पकड़ हमेशा बनी रहे, ऐसा न हो कि कल दे दिन हमारे हाथ में कुछ न रह जाए।

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