अंडरवियर बता रही कितनी सेहतमंद है धरती!
मई 27, 2021 | By - नितिन सिंह भदौरिया

अंडरवियर बता रही कितनी सेहतमंद है धरती!

अगर आपसे कहा जाए कि अंडरवियर की मदद से धरती की सेहत का पता लगाया जा सकता है तो शायद आपको भरोसा न होलेकिन बीते कुछ दिनों से अमेरिका ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में ज़मीन की सेहत जानने के लिए एक ऐसा ही अभियान चल रहा है। दरअसलइन देशों में लोग अपनी बगीचों खेतों और खेल के मैदानों में कॉटन के अंडरवियर दो महीनों के लिए जमीन में दबा रहे हैं। वहीं दो महीने बाद जब जमीन से अंडरवियर बाहर निकाले जाते हैं तो वे धरती की सेहत से जुड़ी तमाम जानकारियां (Connection of underwear to soil health) देता है।

2008 में शुरू हुई ये पहल

इस अभियान को न्यू साउथ वेल्स में न्यू इंग्लैंड विश्वविद्यालय में पर्यावरण एंव ग्रामीण विज्ञान के एक वरिष्ठ व्याख्याता ओलिवर नॉक्स (Oliver Knox) और ऑस्ट्रेलियाई कपास उद्योग के संयुक्त विस्तार कार्यक्रम सैली डिकिंसन कॉटनइन्फो (CottonInfo)ने 2018 में शुरू किया। दरअसल नॉक्स और सैली के एक क्षेत्रीय अधिकारी ने 50 किसानों से पूछा कि क्या वे अपने खेतों की सेहत जानने के लिए वहां अंडरवियर दफनाना पसंद करेंगे। नॉक्स ने बताया कि किसानों न सिर्फ ऐसा करने पर सहमति दी बल्कि उनमें दूसरे किसानों से प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिली। किसान यह जानने के लिए उत्सुक थे कि क्या मेरे खेत की मिट्टी मेरे साथी किसान से ज्यादा बेहतर और उपजाऊ हैं।

अंडरवियर का परिणाम देखकर हैरान रह गए किसान

इसके लिए किसानों को कपास की अंडरवियर दी गईं जिन्हें दो महीने (करीब 60 दिन) तक जमीन में दबाने को कहा गया। जब तय अवधि के बाद किसानों ने जमीन में दबी अंडरवियर को बाहर निकाला तो वे हैरान रह गए। ये तरकीब सच में काम कर रही थी। बताया गया कि इस दौरान अंडरवियर का कपड़ा जितना अधिक नष्ट हो जाता है जमीन की सेहत उतनी ही अच्छी मानी जाती है।

कपास का मिट्टी की सेहत से कनेक्शन

कपास सेल्यूलोज नामक चीनी से बना होता है जिसे रोगाणु और मिट्टी में रहने वाले अन्य छोटे डीकंपोजर जीव बड़े चाव से खाते हैं। जिस मिट्टी में अधिक रोगाणु और डीकंपोजर जीव पाए जाते हैं उसे अधिक उपजाऊ माना जाता है।

खेतों का रख-रखाव शुरू कर रहे किसान

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके दो फायदे हैं एक तो हमें पता चलता है कि किस जगह की जमीन कितनी स्वस्थ्य है। वहीं हम इसके संरक्षण के लिए क्या कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के बाद जिन किसान के खेतों में दबी अंडरवियर ज्यादा नष्ट नहीं हुई थी उन्होंने अपने खेतों को और उपजाऊ बनने के प्रयास शुरू कर दिए। किसानों ने खेत में पैदा होने वाली फसलों का रोटेशन बदल दिया और जमीन पर अधिक ठूंठ छोड़ने शुरू कर दिए। यह अभियान धीरे-धीरे स्कूलों और लोगों के घरों में भी पहुंच गया। लोग अपने घर के गॉर्डन और शिक्षकों की मदद से बच्चे स्कूल में भी मिट्टी की सेहत जानने के लिए इस विधि को अपना रहे हैं।
अगर आंकड़ों की बात करें तो अब तक ऑस्ट्रेलिया में करीब 400 लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लिया है। जिसकी मदद से वैज्ञानिकों को महाद्वीप के अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी से जुड़ी तमाम जानकारियां मिली हैं।

दुनियाभर में फैला अंडरवियर का ये अभियान

ऑस्ट्रेलिया से शुरू हुआ ये अभियान अब कई देशों में फैल गया है। स्विट्जरलैंड में ज्यूरिक यूनिवर्सिटी और स्विस इंट्टियूट ऑफ सेसटेनेबल साइंसेज द्वारा यह शोध किया जा रहा है। जिसमें लोगों को करीब 2 हजार जोड़ी अंडरवियर दिए गए हैं। वहीं लोग भी इन्हें बड़ी उत्सुकता से जमीन में दबा रहे हैं ताकि वे जमीन के बारे में जान सकें।

वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी

कई वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि हमारे पास 60 साल से भी कम समय के इस्तेमाल की ऊपरी मिट्टी बची है। इसके लिए जरूरी है कि हम ऐसे तरीकों को अपनाएं, जिससे मिट्टी के माइक्रोबायोम का पुननिर्माण हो सके और मिट्टी का स्वास्थ्य, लचीलापन और उत्पादकता बनी रहे। ये मात्र एक तरीका है जो हमें भविष्य की तबाही से बचा सकता है।

उम्मीद है कि आपको इस ब्लॉग में दी गई जानकारी पसंद आई होगी। Alshorts लगातार ऐसे ही विषयों पर आपको दिलचस्प जानकारी उपलब्ध कराता रहेगा। हमारे साथ जुड़े रहें और पढ़ते रहिए देश और दुनिया से जुड़े रोचक ब्लॉग्स।

AVAILABLE ON

Optimized with PageSpeed Ninja