चक्रवात ताऊ ते से जुड़ीं अपनी सारी जिज्ञासाएं यहां जान लीजिए
मई 16, 2021 | By - Vaibhav Sharma

चक्रवात ताऊ ते से जुड़ीं अपनी सारी जिज्ञासाएं यहां जान लीजिए

इस साल का सबसे पहला तूफ़ान ताऊ ते (TaukTae) जिसने अरब सागर (Arabian Ocean) में अपनी दस्तक दे दी है। जिसके चलते भारत में बचाव कार्य को पहले से ही शुरू किया जा चुका है। पिछले दिनों इंटरनेट पर भी इस चक्रवात ने लोगों को अपने नाम को लेजर असमंजस में डाले रखा। इस ब्लॉग की कड़ी में हम आपको इस साइक्लोन के बारे में हर वो जानकारी देंगे जो आप जानना चाहते हैं।

Gecko cyclone tauktae

Tauktae यानि ताऊ ते चक्रवात

यह नाम सबसे पहले म्यांमार ने दिया था, यह एक छिपकली की प्रजाति का नाम है। जिसके सन्दर्भ में कहा गया है कि यह छिपकली शोर मचाती है और बेहद हिंसक है। इसकी वजह से मुंबई, गोवा, दक्षिण कोंकण के साथ गुजरात के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भारत में 2 से 4 दिन तक रहेगा। वैसे म्यांमार की भाषा में इसे गेको छिपकली भी कहा गया है। चक्रवातों के नामों को लेकर भी एशिया पैसिफिक क्षेत्र में 13 देश शामिल हैं। जिसमें भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, मालदीव, ओमान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन हैं। ये देश मिलकर चक्रवातों के नाम भी तय करते हैं।

TaukTAe in india

कैसे आ रहा है ताऊ ते

अरब सागर में उठा ये चक्रवाती तूफ़ान उत्तर की ओर बढ़ गया है। गोवा के पंजिम से लगभग 250 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिन और मुंबई से 620 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम पहुंच चुका है। इसका असर देश के कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। लक्ष्यद्वीप, गोवा में पणजी, गुजरात और कर्नाटक समेत कई राज्यों में इसका करीबी असर देखने को मिलेगा। समुद्री इलाकों से सटे राज्यों के लिए बचाव कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।

कर्नाटक के तटीय इलाक़ों, महाराष्ट्र और गुजरात में मूसलाधार बारिश और तेज़ हवाओं की आशंका जताई गई है। इस चक्रवात के कारण पेड़ गिर सकते हैं, घास-फूंस के बने घरों को नुकसान हो सकता है और सड़कें भी प्रभावित हो सकती हैं। सरकार ने मछुआरों को भी फिलहाल तटों से दूर रहने की सलाह दी है।

18 मई होगी परीक्षा की घड़ी

मौसम विभाग के सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार यह तूफ़ान 18 मई के आस-पास जरात तट को पार करते हुए उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा, इस समय इसकी तीव्रता बहुत अधिक होगी, ऐसे में स्थानीय सरकार ने लोगों को चेतावनी जारी करते हुए हाई अलर्ट भी घोषित कर दिया है।

ताऊ ते से फायदा या नुकसान

इस विषय पर मौसम विशेषज्ञों की राय बंटी हुई नजर आती है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस तूफ़ान के आने से मानसून में देरी की आशंका है। वहीं दूसरी तरफ एक अन्य मौसम विशेषज्ञों के गुट का कहना है कि यह सब निराधार है, कई बार ऐसे तूफ़ान अपने साथ मानसून लेकर भी आते हैं। लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मौसम विभाग की ओर से ऐसा कोई अनुमान जारी नहीं किया गया है। विभाग के मुताबिक मानसून अपने तय समय पर ही आएगा।

  • मौसम विभाग का अनुमान है कि इस चक्रवात का सबसे ज्यादा असर गुजरात पर पड़ेगा।
  • द्वारका, कच्छ, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, राजकोट, मोरबी और जामनगर जिलों में भारी नुकसान की आशंका
  • लक्षद्वीप में आज कई इलाकों में इस चक्रवात की वजह से भारी बारिश की आशंका।
  • 50 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
  • गोवा के तटीय इलाकों में भारी बारिश।
  • कनाटक के समुद्री इलाकों में भारी बारिश।

उम्मीद है कि आपको इस ब्लॉग में दी गई जानकारी पसंद आई होगी। AlShorts लगातार ऐसे ही विषयों पर आपको दिलचस्प जानकारी उपलब्ध करवाता रहेगा। हमारे साथ जुड़े रहें और पढ़ते रहिए देश और दुनिया से जुड़े रोचक ब्लॉग्स।

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