कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद साइड इफेक्ट हैं तो खुश हो जाइए, ‘बिकॉज इट्स वर्किंग’
जून 12, 2021 | By - नितिन सिंह भदौरिया

कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद साइड इफेक्ट हैं तो खुश हो जाइए, ‘बिकॉज इट्स वर्किंग’

पूरा विश्व करीब एक साल से कोरोना (Covid-19) महामारी से जूझ रहा है। इससे निपटने के लिए ज्यादातर देशों में कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं तो वहीं स्थिति बिगड़ने पर कुछ देशों में संपूर्ण लॉकडॉउन तक लगाना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी से छुटकारा पाने के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका है। इसके बाद से सभी देशों ने टीकाकरण पर खास ध्यान देना शुरू किया, लेकिन कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ लोगों में पाए गए प्रतिकूल परिणामों से लोगों में भय है। शायद यही वजह है कि लोगों में कोरोना टीकाकरण को लेकर एक हिचकिचाहट (खासकर कम साक्षरता वाले क्षेत्र या ग्रामीण इलाकों में) देखने को मिलती है। आज इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों कोरोना वैक्सीन लगवानें पर कुछ लोगों में ऐसे साइड इफेक्ट्स (Side Effects) देखने को मिलते हैं।

अगर कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद साइड इफेक्ट है तो खुश हो जाइए

विशेषज्ञों का कहना है कि न सिर्फ कोरोना वैक्सीन बल्कि जब हम कोई भी टीका लगवाते हैं तो शरीर पर उसके अस्थायी दुष्प्रभाव (Side Effects after Vaccination) नजर आते हैं जैसे सिर दर्द, थकान और बुखार। ऐसे में आपको बिल्कुल भी डरने या परेशान होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि आपको खुश होना चाहिए क्योंकि ये सभी लक्षण इस बात का संकेत देते हैं कि आपका प्रतिरक्षा तंत्र और अधिक सक्रिय हो रहा है। यह किसी भी टीके के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया है और ये दुष्प्रभाव (Side Effects) भी आम हैं।

विशेषज्ञों ने बताई पते की बात

कोविड-19 टीके की पहली खुराक लेने के बाद थकान का अनुभव करने वाले अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के टीका प्रमुख, डॉ पीटर मार्क्स ने कहा, ‘इन टीकों को लेने के अगले दिन, मैं कोई भी ऐसी शारीरिक गतिविधि नहीं कर सकता था जिसमें बहुत जोर लगाना पड़ता हो।भारत के महामारी विशेषज्ञ का कहना है कि कोरोना वैक्सीन लगवाने पर एलर्जी, थकान, हल्का बुखार जैसे साइड इफेक्ट देखने को मिल सकते हैं। ऐसा आम तौर पर होता ही है, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। टीकाकरण के बाद आने वाला बुखार पैरासिटामोल खाने से ही सही हो जाता है।

आखिर क्यों होता है साइड इफेक्ट

अब आपके दिमाग में सवाल उठेगा कि आखिर ऐसा होता क्यों है तो इसे समझने के लिए हमें अपने प्रतिरक्षा तंत्र को समझना होगा।  इम्यून सिस्टम के दो मुख्य हिस्से हैं, जिनमें से पहला शरीर के कोई भी विदेशी तत्त्व की मौजूदगी का एहसास होते ही सक्रिय हो जाता है। जहां टीका लगा होता है वहां वाइट ब्लड सेल इकठ्ठा हो जाते हैं, जिससे सूजन और जलन होती है और उसी की वजह से सिहरन, दर्द, थकान और दूसरे दुष्प्रभाव होते हैं। यह तुरंत होने वाली प्रतिक्रिया उम्र के हिसाब से कम होती जाती है। यह उन कारणों में से एक है जिनकी वजह से बुजुर्गों के मुकाबले युवाओं में ज्यादा दुष्प्रभाव देखे जाते हैं। यह भी सच है कि कुछ टीकों के दूसरे टीकों के मुकाबले ज्यादा दुष्प्रभाव होते हैं। हालांकि, हमें यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर शरीर की प्रतिक्रिया अलग होती है।

लिंफ नोड में अस्थायी सूजन से घबराएं नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपको टीके की कोई भी खुराक लेने के एक या दो दिन बाद कुछ महसूस न हो रहा हो तो इसका यह मतलब नहीं है कि टीका काम नहीं कर रहा है। परदे के पीछे टीका इम्यून सिस्टम के दूसरे हिस्से को भी सक्रिय कर देता है, जिससे एंटीबॉडी बनते हैं और शरीर को कोरोना वायरसकाकरण से पहले नियमित मैमोग्रामसे असली बचाव मिलता है। टीका लगवाने के बाद एक बहुत परेशान करने वाला साइड इफेक्ट भी है। इम्यून सिस्टम के सक्रिय होने के बाद कभी कभी लसीका पर्वों यानी लिंफ नोड में अस्थायी सूजन हो जाती है, जैसे बाहों के नीचे। वहीं महिलाओं को कोविड-19 टी कराने की सलाह दी जाती है, ताकि गांठ को गलती से कैंसर न समझा जाए।

सामान्य नहीं होते सभी साइड इफेक्ट

विशेषज्ञों की मानें तो सभी दुष्प्रभाव नियमित या सामान्य नहीं होते, लेकिन दुनियाभर में करोड़ों टीके दिए जाने और गहन सुरक्षा निगरानी के बाद कुछ गंभीर जोखिमों की पहचान हुई है। एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) और जॉनसन एंड जॉनसन (johnson and johnson) द्वारा निर्मित टीके लेने के बाद एक मामूली आबादी ने असामान्य प्रकार के रक्त के थक्के जमने की शिकायत की। कुछ देशों में इन टीकों को बुजुर्गों के लिए ही रख दिया गया, लेकिन नियामक संस्थाओं का कहना है कि इन टीकों से जो लाभ हैं उनका वजन जोखिमों से ज्यादा है। कुछ लोगों को कभी-कभी कुछ गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया भी हो जाती है। यही वजह है कि टीका लगाने के बाद चिकित्सकों द्वारा आपको कम से कम 15 मिनट तक टीकाकरण केंद्र पर ही रुकने के लिए कहा जाता है, जिससे कोई प्रतिक्रिया होने पर उसका तुरंत इलाज किया जा सके। इसके अलावा यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि कई तरह के संक्रमण के साथ कभी कभी ह्रदय में होने वाली अस्थायी सूजन और जलन भी एमआरएनए टीकों का कोई दुर्लभ साइड इफेक्ट तो नहीं है।

गौरतलब है कि अब हर देश के पास कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए करीब 2 या उससे अधिक वैक्सीन के विकल्प मौजूद हैं। जैसे भारत में कोवैक्सीन (Covaccine) और कोविशील्ड (Covishield)। यह दोनों ही वैक्सीन अपने अपने स्तर पर कोरोना से बचाने का कार्य करती हैं। एक वैक्सीन अधिक प्रभावी है तो दूसरी थोड़ी कम। वहीं पूरी तरह इम्यून होने के लिए एक वैक्सीन के दो डोज लेना जरूरी है, लेकिन विशेषज्ञ अब वैक्सीन मिक्स करने की एक अलग संभावना तलाश रहे हैं, जिसके जरिए लोग अधिक इम्यून हो जाएं।

मिक्स कोरोना टीकाकरण पर हो रहा विचार

इसके चलते जो लोग पहले कोविशील्ड की वैक्सीन ले चुके हैं, उन्हें दूसरे डोज में कोवैक्सीन देने पर विचार किया जा रहा है। ताकि पता लगाया जा सके कि क्या वैक्सीन को ऐसे मिक्स करने से शरीर अधिक इम्यून होगा या वैक्सीन का असर कम हो जाएगा। इसी तरह की जिज्ञासा आम लोगों में भी है, ऐसे बहुत से लोग हैं जो पहला डोज ले चुके हैं। लेकिन वह वैक्सीन अभी मौजूद नहीं है। ऐसे में वैक्सीन को मिक्स करना कितना फायदेमंद लोगों के लिए होगा और कितना देश हित में समझते हैं।

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