देश में मेडिकल सिस्टम वेंटिलेटर पर, कोरोना से उखड़ रही जनता की सांसें! 
मई 2, 2021 | By - नितिन सिंह भदौरिया

देश में मेडिकल सिस्टम वेंटिलेटर पर, कोरोना से उखड़ रही जनता की सांसें! 

कोरोना (COVID-19) की दूसरी लहर के बीच भारत में दिनोंदिन स्थितियां और भयावह होती जा रही है। एक ओर देश रोजाना विश्व स्तर पर नए आंकडे बना रहा है। वहीं दूसरी ओर मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे, ऑक्सीजन के लिए हाहाकार (Lack of oxygen) मचा हुआ है। एम्बुलेंस और ऑक्सीजन के लिए इंतजार में लोगों की सांसें उखड़ रहीं हैं, यहां तक कि श्मशान घाट (Crematorium) और कब्रिस्तानों में भी शवों को लाइन में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।

भारत में एक बेड पर दो मरीजों का इलाज

अगर देखा जाए तो पिछले साल इसी समय में कोरोना (COVID-19) की पहली लहर के दौरान देश महामारी के लिए तैयार नहीं था, लेकिन एक साल बाद जब भारत के पास दो कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) हैं, महामारी को लेकर पहले से अधिक जानकारी है साथ ही अधिक प्रशिक्षित चिकित्सक भी, बावजूद इसके भारत दैनिक संक्रमणों के वैश्विक रिकॉर्ड को तोड़ रहा है। अगर पिछले 24 घंटों की बात करें तो भारत में 4,01,993 नए मामले सामने आए, जो एक दिन में किसी भी देश में पाए गए सबसे अधिक मामले हैं। वहीं इस दौरान 3,523 मरीजों की मौत हो गई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारत की इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है (Who is responsible for the growing corona cases in India)?

डॉक्टर बोले, दूसरी कोरोना लहर दहकती आग की तरह

Delhi cremation covid

भारत में कोरोना की नई लहर के बारे में उजाला सिग्नस अस्पताल के संस्थापक और निदेशक डॉ. शुचिन बजाज (Dr. Shuchin Bajaj) कहते हैं, ‘यह दहकती हुई आग की तरह है। यह जिसको भी छू रही है उसे जला डाल रही है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रवक्ता तारिक जसारेवीव के मुताबिक, ‘ऐसा लगता है कि इस संस्करण में मानव कोशिकाओं को अधिक आसानी से संलग्न करने की क्षमता है। जाहिर है कि इससे अधिक लोग संक्रमित होंगे और अधिक लोग अस्पताल (Covid-19 Hospital) में भर्ती होंगे।’

कोरोना के वेरिएंट भी जिम्मेदार

कोरोना के वेरिएंट भी बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार

महामारी पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ भारत में इस कोरोना विस्फोट के लिए कई कारणों को जिम्मेदार बता रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादकों (Vaccine Producers) में से एक होने के बावजूद, भारत के पास अपनी योग्य जनसंख्या को टीका लगाने के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं है। इसके साथ ही सरकार की वैक्सीन रोलआउट (Vaccine rollout)  बेहद सुस्त है, यही वजह है कि टीकाकरण को तीन महीने बीत जाने के बाद भी भारत में मात्र 15 करोड़ के करीब लोगों को वैक्सीन लगी है। वहीं सरकार की लापरवाही के चलते कोरोना के वेरिएंट (Covid-19 Variants) भी भारत में तेजी से फैल रहे हैं।

क्या लोगों में खत्म हो गया कोरोना का खौफ?

साइकिल से पत्नी के शव को ले जाता पति

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल भारत में दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन (Lockdown) लगाया गया था। कई महीनों तक घूमने-फिरने और एक जगह एकट्ठा होने पर भी पाबंदी थी। फिर जैसे ही भारत में लॉकडाउन खत्म हुआ लोगों ने ज्यादा घूमना और घरों से बाहर आना शुरू कर दिया। जब तक लोगों को कोरोना के लक्षण और उसके दूरगामी परिणामों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी तो लोग कोरोना नियमों का सख्ती से पालन कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना से रिकवर होने वाले मामलों की संख्या बढ़ी वैसे ही लोगों में कोरोना का डर भी खत्म हो गया। वहीं कोरोना टीकाकरण शुरू होने पर लोगों को लगा कि अब तो पुराने दिन वापस आ जाएंगे।

एम्स निदेशक ने बताई पते की बात

एम्स (AIIMS) के निदेशक और कोविड-19 मैनेजमेंट की नेशनल टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोरोना के बढ़ते मामलों में इस बार युवाओं की संख्या ज्यादा है। कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों की बढ़ती तादात देख उन्हें लग रहा है कि संक्रमण हुआ भी तो हल्का ही होगा और वो ठीक हो जाएगा। इसीलिए वो कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं।

लोगों को भ्रमित कर रही सरकार

कोरोना काल में पीएम मोदी की चुनावी रैलियां

डॉ. गुलेरिया ने बताया कि सरकार खुद लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के नेता लोगों से मास्क लगाने और कोरोना नियमों का पालन करने की बातें तो कर रहे हैं, लेकिन खुद तरह-तरह के आयोजनों और ऐसी चुनावी रैलियों (Election rallies) में हिस्सा ले रहे हैं, जहां लोग कोरोना के नियमों (Corona protocol) का पालन करते नहीं दिख रहे।

चुनाव आयोग कर रहा खानापूर्ति

कोरोना काल में नेताओं की चुनावी रैलियां

बता दें कि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बीते साल देश के सबसे पिछड़े राज्य में गिने जाने वाले बिहार में विधानसभा चुनाव हुए। इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सत्ताधारी पार्टी और तमाम विपक्षी नेताओं ने विशाल जनसभाओं का आयोजन किया। वहीं जब भारत में रोज कोरोना के 2 लाख नए मामले सामने आ रहे थे, तब देश की तमाम पार्टियां पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में बड़ी-बड़ी जनसभाएं कर रही थीं। वहीं पार्टियों और नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने वाला चुनाव आयोग (Election commission) भी इस दौरान खानापूर्ति करता नजर आया।

महाकुंभ से शुरू हुआ कोरोना विस्फोट

कोरोना काल में महाकुंभ का आयोजन

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालातों में हरिद्वार में हुए महाकुंभ (Mahakumbh) के आयोजन को अनदेखा नहीं किया जा सकता। जिसके चलते कोरोना संक्रमण ने भयावह रूप धारण कर लिया। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुंभ के दौरान हरिद्वार जिले में करीब 2,483 संक्रमित पाए गए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत भी संक्रमित हुए। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुंभ के आयोजन पर सवाल उठने लगे। विवाद को बढ़ते देख कुंभ का समापन कर दिया गया।

क्या सच में धीमा है दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना टीकाकरण अभियान?

भारत का कोरोना टीकाकरण अभियान

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया गया कि कोरोना की इस दूसरी लहर में बड़ी संख्या में बलस्टर इंफेक्शन (बड़े समूहों में कोरोना फैलना) के मामलों में तेजी देखी गई है। वहीं दूसरे देशों से आए कोरोना के वेरिएंट और कोरोना टीकाकरण की धीमी गति भी इसके लिए जिम्मेदार है। आंकड़ों के मुताबिक, तीन महीनों में केरल, गुजरात और छत्तीसगढ़ अपने राज्य के 5 फीसदी लोगों को टीका लगा पाए हैं। फिलहाल सरकार का लक्ष्य है कि 45 साल से अधिक आयु के सभी लोगों को टीका लगवाना है। वहीं छत्तीसगढ़ और गुजरात ही ऐसे राज्य है जो 20 प्रतिशत से ज्यादा लक्ष्य पूरा कर चुके हैं। जबकि तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, आंध्रप्रदेश, असम जैसे बड़े राज्य 10 प्रतिशत के लक्ष्य तक भी नहीं पहुंच पाए हैं। इस धीमी गति के टीकाकरण के दो कारण है वैक्सीन की कमी और टीकाकरण को लेकर हिचक। इसके लिए सरकार को टीकाकरण की गति बढ़ाने के साथ वैक्सीन को लेकर लोगों में फैले भ्रम को भी दूर करना होगा।

हालांकि, भारत की मदद के लिए कई मित्र राष्ट्रों ने उस मुश्किल समय में देश की मदद को हाथ आगे बढ़ाए हैं। जिसके चलते आगामी कुछ समय में स्थितियां नियंत्रण में आने की संभावनाएं बढ़ीं हैं।

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