रिपोर्ट: देर तक काम किया तो हो सकता है मौत का खतरा!
मई 18, 2021 | By - Vaibhav Sharma

रिपोर्ट: देर तक काम किया तो हो सकता है मौत का खतरा!

हम में से कई लोग देर तक काम करने के आदी होते हैं, कई बार ऐसा ऑफिस की जरूरत के कारण भी होता है। कई बार कल के काम को आज ही निपटाने के लिए भी हमें देर तक कार्य करना पड़ता है। लेकिन सावधान कहीं ये स्मार्ट वर्किंग आप पर भारी ना पड़ जाए। जी हां, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा काम करने एवं वर्कलोड से मौत का खतरा बढ़ जाता है। डब्‍ल्‍यूएचओ के वैज्ञानिकों के शोध में पता चला है कि लाखों लोगों की मौत लंबे समय तक काम करने से हो रही है। हम आपके लिए यह रिपोर्ट हिंदी भाषा में लाए हैं।

वर्कलोड और वर्क फ्रॉम होम

कोरोना और वर्क फ्रॉम होम का वर्कलोड

आप सोचेंगे हम आपको अचानक कोरोना और वर्क फ्रॉम होम पर क्यों ले आए। यहां आपका सोचना बिलकुल सही है क्योंकि यह रिपोर्ट इसी कोरोनाकाल से जुड़ी है। दरअसल, जहां ऑफिस टाइम में काम 8 से 9 घंटे रहता था वहीं कोरोना के चलते आए वर्क फ्रॉम होम में वर्कलोड लगभग दुगुना हो गया है। ‘मैं काम कर रहा हूं’ यह दिखाने के लिए कई कर्मचारी कई घंटों तक लेपटॉप या कम्प्यूटर के सामने बैठे रहते हैं। यही स्मार्ट वर्क आपके लिए खतरे की घंटी है।

कैसे? यहां जान लीजिए

एनवायरमेंट इंटरनेशनल की शोध के अनुसार, ऑफिस के वर्कलोड के चलते युवा दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डब्ल्यूएचओ और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (आईएलओ) के संयुक्त बयान में वर्क लोड और काम की अधिकता को लेकर कहा गया है कि कहा गया है कि साल 2016 में 55 घंटे काम करने से दुनियाभर में 3,98,000 लोग हृदयाघात और 3,47,000 स्ट्रोक्स के चलते अपने जान गंवा बैठे। इस शोध में बताया गया कि 2000 और 2016 के बीच, लंबे समय तक काम करने के कारण हृदय रोग से होने वाली मौतों की संख्या में 42% और स्ट्रोक से 19% की वृद्धि हुई है। वाकई में यह चौंकाने वाले आंकड़े हैं।

वर्कलोड से होने वाली मौते

वर्कलोड की रिपोर्ट ने चौंकाया

  • काम के तय घंटों से ज्‍यादा समय तक काम करने से एक साल में हजारों लोगों की जान जा रही है।
  • पश्चिमी प्रशांत और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में मध्यम आयु वर्ग के 72 प्रतिशत पुरुषों की मौत हो गई।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के दौरान मौतों में बढ़ोतरी हो गई है।
  • महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम वाले कर्मचारियों का तनाव लगातार बढ़ता रहा है।
  • आप भी लंबे समय तक लैपटॉप के आगे नजरें गड़ाए बैठे रहते हैं तो आप भी अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
  • 2016 में ज्यादा देर तक काम करने के चलते स्ट्रोक (Stroke) और हृदय रोग (Heart disease) के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है।
  • यह शोध 194 देशों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है।

गंभीर हैं ये 55 घंटे…

  • हर हफ्ते 35-40 घंटे काम करने वाले कर्मचारियों में दिल कि बीमारियां बेहद कम।
  •  55 घंटे या उससे ज्‍यादा काम करने वालों में 35 फीसदी लोग स्ट्रोकऔर 17 फीसदी लोगों की जान जोखिम में।
  • लंबे समय तक काम करने के साइड इफेक्ट्स से चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया के कर्मचारी सबसे ज्‍यादा प्रभावित हैं।
  • डब्‍ल्‍यूएचओ के प्रमुख टेडरोस एडनॉम घेब्रेसियस ने कहा कि महामारी के दौरान अनुमान के तौर पर 9 फीसदी लोग लंबे समय तक काम कर रहे हैं।
  • ऐसे लोगों में स्ट्रेस से होने वाली बीमारियों के लक्षण काफी बढ़े हैं।
  • अध्ययन से पता चला है कि ज्यादातर पीड़ित यानी 72 फीसदी पुरुष थे।

बचाव के उपाय

  • लगातार एक जगह बैठे रहने से बचे।
  • आस-पास या अपने सहकर्मी से फ़ोन या चैटिंग के दौरान बातचीत जरूर करें।
  • कोरोना महामारी में फैले तनाव से घबराएं नहीं, परिवार से बातचीत करते हैं।
  • नौकरियों के संकट के चलते अपना आज बर्बाद ना करें भविष्य का सोचे।
  • पानी और एनर्जी ड्रिंक्स लेते रहे, कार्य को लेकर अपने सहकर्मियों से चर्चा करते रहे।
  • बीच-बीच में टहले और ताजी हवा लेने की कोशिश करें।
  • लंच के वक्त लेपटॉप या कंप्यूटर से दूरी बना लें।
  • अपने खान-पान का बेहद ख्याल रखे।

यानि अपने कार्य के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य की चिंता करना भी अति आवश्यक है। यदि आप भी ऐसी ही कार्यशैली से जुड़े हैं तो थोड़ा इसमें बदलाव कीजिए और कुछ घंटों का ब्रेक जरूर लीजिए।

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