इस बार क्यों ख़ास रहा जीसीसी सम्मेलन, जानें अरब देशों की समिट का सारा लेखा-जोखा
जनवरी 8, 2021 | By - Abhishek Pandey

इस बार क्यों ख़ास रहा जीसीसी सम्मेलन, जानें अरब देशों की समिट का सारा लेखा-जोखा

हाल ही में जीसीसी समिट की सूचना आते ही कई देशों की निगाहें इस महत्तवपूर्ण समिट पर टिक गई थीं। ये एक महत्वपूर्ण समझौता है जो खाड़ी देशों को एक-साथ जोड़े रखता है। इसे समझने के लिए सबसे पहले हमें इसके इतिहास को जानना होगा। इस बार इस समिट का मेजबान सऊदी अरब रहा था, जिसमें सभी खाड़ी  देशों ने चर्चा की और एकसूत्र में बंधने का प्रयास किया था। शुरू करते हैं अरब देशों के एकजुट होने की कहानी जहां इस परिषद के जरिए सभी देशों की मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध साझा हुए। 

जीसीसी समिट यानि खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council) यह संगठन खाड़ी से घिरे देशों का एक क्षेत्रीय समूह है। जिसमें सदस्य देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात है, इसका मुख्यालय सऊदी अरब के  रियाद में स्थित है।

कुवैत सरकार ने 6 अरब खाड़ी राज्यों को एक मंच पर लाने का प्रस्ताव रखा था। ये देश विशेष सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधनों से जुड़े थे और उन्हें एक मंच पर लाने के लिए इसकी आधारशिला रखी गई। जिसके चलते रियाद समझौता भी बनाया गया। इसके बाद साल 1981 की 25 और 26 मई को अबू धाबी में 6 खाड़ी देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अध्यक्षों ने परिषद के संविधान पर हस्ताक्षर करने के साथ खाड़़ी सहयोग परिषद (GCC) को अस्तित्व में लाए।

ये था परिषद् का उद्देश्य 

खाड़ी सहयोग परिषद बनाने का उद्देश्य सदस्य देशों में एकता लाने के लिए सभी क्षेत्रों में उनके समन्वय और सहयोग को स्थापित करना है। सदस्य देशों के नागरिकों के विकास के लिए उद्योग, खनिज, कृषि, समुद्री संसाधन और जैविक संसाधन क्षेत्रों में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहन देना। GCC के सदस्य देशों की बैठक प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है, जिसमें राष्ट्राध्यक्ष बैठक में शामिल होते हैं। जीसीसी ने संयुक्त उद्यम परियोजनाओं के वित्तीय पोषण के लिए 6 बिलियन कोष का गठन किया। जीसीसी में सबसे महत्तवपूर्ण विषय तेल और तेल से संबद्ध हैं, क्योंकि इसके सदस्यों के पास विश्व का लगभग 40 प्रतिशत तेल का भण्डार है। जीसीसी के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था विश्व में तीव्र गति से विकास करती दिखती हैं। जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल है। इसके अलावा यह क्षेत्र कई खेल प्रतियोगिताओं के लिए भी एक आकर्षक स्थल के तौर पर भी सामने आया है। जिसमें कतर में साल 2006 में हुए एशियाई गेम्स से लेकर यूएई में आईपीएल और कई बड़े खेलों का आयोजन होना।

41वां जीसीसी शिखर सम्मेलन

साल 2021 में लम्बे समय के बाद सऊदी अरब के अल-उला शहर में गल्फ कॉपरेशन काउंसिल का 41वां शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। 41वां शिखर सम्मेलन के लिए जो जगह चुनी गई वह भी चर्चा का एक बड़ा विषय रही। क्योंकि यह सम्मेलन दुनिया की सबसे बड़ी कांच की इमारत में आयोजित किया गया। इस इमारत का नाम मराया कॉन्सर्ट हॉल है और यह सऊदी अरब के अल-उला शहर से 22 किलोमीटर दूर यूनेस्को द्वारा तय वर्ल्ड हैरिटेज साइट अल-हिजरा पर स्थित है। इस इमारत को मशहूर डिजाइनर जीन नोवेल ने डिजाइन किया है। 5 हजार वर्ग मीटर में बनी इह इमारत के हॉल में एक साथ 500 से ज्यादा लोगों के बैठने की व्यवस्था है।

कोरोना महामारी के बीच खाड़ी देशों का शिखर आयोजित किया गया। लेकिन सभी नजरें इस इमारत की जगह जीसीसी शिखर सम्मेलन में होने वाले फैसले को लेकर थी। इस दौरान समिट में शामिल खाड़ी देशों के बीच अल-उला घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत खाड़ी क्षेत्र में शांति और समृद्धि को मजबूती प्रदान किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह फैसला रहा चर्चा का विषय 

सऊदी अरब ने साल 2017 में कतर पर कई पाबंदियां लगा दी जिसमें उसके जमीन, आकाश और समंदर तीनों मार्ग बंद कर दिए थे। इस दौरान सऊदी अरब के इस कदम पर यूएई, मिस्र और बहरीन का भी साथ मिला था। कतर पर इन सभी पाबंदियों की वजह से बेहद मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। इस दौरान सऊदी अरब ने पाबंदियों को हटाने के लिए कई शर्तें रखी थीं लेकिन कतर ने एक भी शर्त को स्वीकार नहीं किया था। जिसके बाद अब साल 2021 में कतर को अचानक गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल समिट (GCC) से पहले निमंत्रण मिलने से साफ पता चला कि सऊदी अरब ने अपने रुख में बदलाव किया है। इस सुलह के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका को बताया जाता जिसके चलते कतर के साथ मामले सुलझे हैं।

अब जीसीसी में शामिल सभी सदस्यों का एक ही शत्रु ईरान है। वहीं खाड़ी देशों के एकता के चलते कोरोना टीकाकरण में मदद मिलने के साथ लोगों की आवाजाही में भी आसानी होगी। जीसीसी के सदस्यों देशों का एकसाथ आने से अब खाड़ी देशों में एक अलग एकता का पर्याय देखने को मिलेगा।

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