मिलिए अरब के कुमार सानू खालिदऔर सोनू निगम साद लमजाद से!
अक्टूबर 30, 2020 | By - Vaibhav Sharma

मिलिए अरब के कुमार सानू खालिदऔर सोनू निगम साद लमजाद से!

संगीत एक ऐसी कला है जो सभी को साथ जोड़े रखती है। खासकर, बॉलीवुड की फिल्में संगीत के बिना अधूरी है। ऐसा नहीं है कि इस कांसेप्ट को केवल भारतीय ही पसंद कर रहे हों। बल्कि, देश-विदेशों में भी भारतीय संगीत की गूंज साफ़ सुनाई देती है। पिछले ही दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो खासा पॉपुलर हुआ था। जिसमें कुछ अरब देश के लोग राजकपूर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘संगम’ के गाने ‘बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं’ को बड़े ही अदब से पेश करते नजर आ रहे हैं। यह केवल संगीत का आदान-प्रदान नहीं बल्कि दो संस्कृतियों के मेल का नायाब नमूना है। क्या आप जानते हैं लगभग सैकड़ों भारतीय गाने अरबी वर्जन में आ चुके हैं जबकि कई अरबी गानों को बॉलीवुड ने भी अपनी भाषा में डब किया है। हालांकि, इन गानों की लम्बी फेहरिस्त है लेकिन अरब देशों में बॉलीवुड के कई फैंस मिल जाते हैं।

जानिए अरबी गायकों के बारे में-

बात जब गानों की चली है तो अरब देशों में ‘साद लमजाद’ और ‘खालिद’ सरीखे गायकों का नाम आना लाजमी है।

बॉलीवुड की फिल्म पद्मावत का ‘बिनते दिल’ ‘साद लमजाद’ ने अपनी आवाज में गाया है वहीं ‘खालिद’ का ‘दीदी’ सॉन्ग ‘एयरलिफ्ट’ के ‘दिल चीज तुझे दे दी’ से कई साल पहले वजूद में आ चुका सिर्फ यही नहीं यहां हम दोनों देशों के संगीत उद्योग के बारे में वो दिलचस्प कहानी पेश करेंगे जिसके बाद आप गानों को सुने बिना नहीं रह पाएंगे।

साद और खालिद की बार करें तो ये वो सिंगर्स हैं जिन्हें अरब देश के सोनू निगम और कुमार सानू कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। खालिद वो आवाज है जो उस समय लोगों के दिलों में राज करती थी जब कुमार सानू के गाने बॉलीवुड में युवाओं का दिल धड़काते थे। इनका गाना ‘दीदी’ आज भी भारत में हिंदी वर्जन ‘दिल चीज तुझे दे दी’ के नाम से सुना जाता है। जब वहां भारत में कुमार सानू सुने जाते थे ये तब अरब देशों के हर घर में सुनाई देते थे। इनके बाद आते हैं साद लमजाद, बेहद विवादित हैं लेकिन पद्मावत का ‘बिनते दिल’ इन्होंने अपनी आवाज में अरबी वर्जन लाकर मिलियन व्यूज पाएं हैं। अरब की युवा पीढ़ी इनके गानों की काफी दीवानी है। आप यूट्यूब पर इनके गानों की लिस्ट खोजेंगे तो मिलियन व्यूज इनके लिए आम बात है। लिहाजा,  भारत में भी कई ऐसे फैंस हैं जो बिनते दिल के बाद इन्हें बखूबी पहचानते हैं।

अरब टू बॉलीवुड का सफर

खाड़ी देशों में भारतीय फिल्मों की बहुत अधिक मांग है। वे भारत के फ़िल्मी सितारों से भी बहुत परिचित हैं। वहीं म्यूजिक की बात करें तो कई गाने ऐसे हैं जिन्हें भारतीय श्रोताओं ने बहुत गुनगुनाया है। जिसमें मेड इन चाइना का ‘नारी-नारी’, अरब सिंगर हाशेम अब्बास का गाया बेहद उम्दा गाना है। वहीं फिल्म फैंटम का ‘अफगान जलेबी’ मोहम्मद बेन मेसौद – ज़िन अल अर्बी भी अरब देश से आया संगीत है। हालांकि सिर्फ बॉलीवुड ने की अरबी गानों को फॉलो नहीं बल्कि कई अरब देश के संगीतकारों ने भी बॉलीवुड के बेहतरीन संगीत को अपनाया है। गैंगस्टर का ‘या अली’, ब्लफमास्टर का ‘बोरो-बोरो’, पद्मावत का ‘खलीबली’, मर्डर का ‘कहो न कहो और गुरु का ‘मैया-मैया’ गाना हिंदी भाषी लोग गुनगुनाते नजर आ जाते हैं। गीतों का जुबान पर चढ़ना बेहद मायने रखता है। ऐसे ही अरेबिक सॉन्ग्स बॉलीवुड ने अडॉप्ट किए हैं।

बॉलीवुड में दुबई की लोकेशन

रास-अल-खेमा हिंदी भाषियों के लिए नाम थोड़ा नया होगा लेकिन इस जानकारी के बाद आप इस जगह को भूलेंगे नहीं! दरअसल, बॉलीवुड में लोकेशन को लेकर एक झोल किया जाता है। जिसे आप असल में दुबई समझते हैं,  संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का राज्य रास-अल-खेमा है। एयरलिफ्ट की आधे से ज्यादा शूटिंग रास-अल-खेमा में हुई है। वहीं दीवाने हुए पागल, दबंग3, रेस3, बेवकूफियां, पार्टनर, सरकार, और वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई भी यूएई की बेहतरीन लोकेशन को दिखाती है। हाल ही में बॉलीवुड की अपकमिंग फिल्म लक्ष्मी का गाना तो ‘बुर्ज खलीफा’ पर फिल्माया गया है। जो बॉलीवुड चार्ट बस्टर्स पर टॉप गानों में शुमार है। इसकी शूटिंग भी दुनिया की सबसे लम्बी इमारत बुर्ज खलीफा के पास ही हुई है। यही नहीं वहां के लोग भी भारतीय फिल्मों और संगीत के खासे शौक़ीन हैं। आपको यहां हर बॉलीवुड सितारे का कोई ना कोई फैन जरूर मिल जाएगा। यहां होने वाले फैशन शोज में भी कई भारतीय अभिनेत्रियां रैंप वॉक करती नजर आ जाती है।

 

बॉलीवुड सितारों का दुबई कनेक्शन

आपको बता दें कि बॉलीवुड पेज 3 की तरह यहां यूएई के अख़बार भी बॉलीवुड से अटे पड़े रहते हैं। यहां अखबारी विज्ञापनों में तो बॉलीवुड का दबदबा है ही, साथ ही सिंगिंग कॉन्सर्ट में भी यहां सोनू निगम, अरिजीत सिंह और सोनू कक्कड़ के काफी कॉन्सर्ट आयोजित किए जाते हैं।

ओमान के मोहम्मद रफ़ी ‘हैथम’

चलते-चलते ओमान के मोहम्मद रफ़ी से भी मिल लीजिए। भारत में ‘दिल है हिंदुस्तानी’ का ख़िताब जीत चुके मोहम्मद रफ़ी हैथम ओमान से आते हैं। इनकी कहानी बेहद दिलचस्प है। इनका असली नाम हैथम अल बलूशी है, लेकिन हैंथम के दादा बॉलीवुड गायक मोहम्मद रफ़ी के बहुत बड़े फैन थे। हैंथम के पिता जब जन्म लेने वाले थे तब मोहम्मद रफ़ी ‘बहरीन’ में परफॉर्म कर रहे थे। हैंथम के दादा मोहम्मद रफ़ी के गाने से इतने प्रभावित थे कि उन्‍होंने अपने बेटे का नाम मोहम्मद रफ़ी अल बलूशी रख दिया और इस तरह हैंथम का मिडिल नेम उनके पिता मोहम्मद रफ़ी के नाम से आया है। इंडियन आइडल में नैना ठग लेंगे से चर्चा में आए हैथम एक ऐसा उदहारण हैं जो संगीत के जरिए दो देशों बीच की खाई को भरने का काम कर रहे हैं। वास्तविकता में संगीत ने कई देशों की दूरियों को मिटाया है। जब आपस में इस तरह संस्कृति और संगीत का आदान-प्रदान होता है तब परस्पर संस्कृतियों का मेल-जोल बढ़ता है। बॉलीवुड हो चाहे अरब देश का संगीत उद्योग दोनों ही तरफ के गायकों को संगीतप्रेमियों ने बहुत प्यार दिया है।

यहां सोनू निगम के एक गाने का जिक्र बेहद लाजमी है जहां वे कहते हैं, ‘पंछी, नदियां, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके!’ ऐसे में संगीत भी एक ऐसी कला है जिसे कोई सरहद या कोई सीमा नहीं रोक सकती।

 

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