अमेरिका में बर्नार्ड को मिली मौत की सजा, क्या टाली जा सकती थी?
दिसम्बर 19, 2020 | By - Vaibhav Sharma

अमेरिका में बर्नार्ड को मिली मौत की सजा, क्या टाली जा सकती थी?

घटना की उस वक्त की है जब दिवंगत ब्रैंडन बर्नार्ड लगभग 18 वर्ष का रहा होगा। वह रात ब्रैंडन के लिए बेहद डरावनी होने वाली थी। उसे मालूम नहीं था जिस घटना को वे अपने साथियों संग अंजाम देने वाले हैं, वही उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल होगी।

टॉड और स्टैची बागले नाम के दंपत्ति अपनी कार से जा रहे थे, इसी दौरान क्रिस्टोफर वियालवा, ब्रैंडन बर्नार्ड और अन्य 3 युवकों ने दंपत्ति से लिफ्ट मांगी। ऐसे में जब दंपत्ति ने लिफ्ट के लिए हामी भरी तब सभी अपराधी उन्हें पास ही किसी सुनसान आइलैंड पर ले गए जहां उन्हें डिग्गी में बंद कर आग के हवाले कर दिया गया था। यहां तब की सारी घटना कोर्ट रूम में भी रिकॉर्ड की गई है। जिसपर कई वर्षों तक वकीलों संग बहस चली। इस अपराध के लिए वियालवा को जस्टिस डिपार्टमेंट ने 24 सितंबर को फांसी दे दी गई थी और बचे ब्रैंडन बर्नार्ड को हाल ही में मौत का इंजेक्शन दिया गया है। अन्य तीन अपराधियों को जेल की सजा सुनाई गई, उन्हें अदालत ने इस हत्याकांड में सहयोगी मानकर सजा सुनाई थी, और उन्हें नाबालिग माना गया था।

 बर्नार्ड की सजा पर एक वर्ग की राय

जहां इस हत्याकांड को लेकर शुरुआती दौर में काफी विवाद हुआ वहीं बर्नार्ड को लेकर भी एक पहलू उभर कर सामने आया। उनकी सजा को नस्लवाद की भेंट चढ़ना भी बताया गया था। अमेरिका में ट्रम्प सरकार के दौरान नस्लवाद चरम पर रहा था। इस सजा पर किम कार्दशियन ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से कई बार सजा माफ़ करने की मांग की। दरअसल, जब तीन अन्य आरोपियों को सहयोगी बता कर जेल की सजा दी जा सकती थी तब बर्नार्ड के साथ हुए अन्याय को लेकर भी सोशल मीडिया पर आवाजें मुखर हुई। इसके अलावा कई यूजर्स ने यह भी कहा कि बर्नार्ड सिर्फ और सिर्फ नस्लवाद कि भेंट चढ़े हैं। वे अपने कर्मों की सजा भुगत चुके हैं, और ऐसे में उन्हें सजामौत देना उनके साथ न्याय नहीं है। गौरतलब है कि बर्नार्ड 18 साल की उम्र से जेल में थे, जिसके बाद उनके 40वें साल में उन्हें मौत की सजा देना न्याय नहीं है। वे अपने जीवन का लगभग आधा हिस्सा जेल में बिता चुके थे। जिस उम्र में युवा अपनी पढाई, नौकरी और जीवन के अन्य पड़ावों से रूबरू होता है उस उम्र में वे दुर्दांत अपराधियों की तरह जेल में बंद थे। इससे बड़ी सजा और क्या होगी कि बर्नार्ड ने अपनी भूल भी कबूल कर ली थी।

 

 ऐसा क्या हुआ था उस दिन?

सूत्रों और स्थानीय मीडिया के अनुसार, मुख्य अपराधी क्रिस्टोफर वियालवा द्वारा दंपत्ति को किडनैप कर एक सुनसान द्वीप पर ले जाने के बाद उसी वक्त सर में गोली मार दी थी। जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई, ऐसे में लाश को ठिकाने लगाने के लिए उन्हें कार की डिग्गी में बंद कर दिया गया। इसके बाद  वियालवा और बर्नार्ड संग सभी आरोपियों ने कार को आग के हवाले कर दिया था। जिसके चलते बर्नार्ड की सजा को कम करने की मांग की गई थी। लिहाजा वे अपराध में संलिप्त तो थे लेकिन सहयोगी मानते हुए उन्हें फिर से जीवन शुरू करने का एक मौका दिया जाना चाहिए था। इस विवादित सजा के दौरान सीनेटर रिचर्ड जे ड्यूबिन, किम कार्दशियन और कोरी ब्रूकर सहित हजारों लोगों ने ट्रम्प से बर्नार्ड को क्षमादान देने की अपील की थी। 

 कोर्ट ने क्या कहा?

सर्वमान्य फैसला कोर्ट को ही लेना था, जिसे मानने के लिए हम सभी बाध्य है। रिपोर्ट के अनुसार, पांच मेंबर की जूरी ने क्षमादान याचिका का समर्थन किया था। इन जूरी मेंबर्स का कहना था कि बर्नार्ड के वकीलों ने उसका सही से बचाव नहीं किया। हालांकि वे ये मानते थे कि बर्नार्ड और वियालवा दोनों दोषी हैं। लेकिन वे यह भी मानते थे कि बर्नार्ड का इरादा पति-पत्नी को मारने का नहीं था। हालांकि, बर्नार्ड की इस सजा पर वकालत करने वाले कुछ जूरी सदस्यों ने आपत्ति भी दर्ज करवाई थी। गौरतलब है कि अटॉर्नी जनरल विलियम बर द्वारा 17 साल के अंतराल के बाद इस साल की शुरुआत में संघीय मृत्युदंड का उपयोग फिर से शुरू करने के बाद बर्नार्ड को दी गई मौत की सजा नौंवी फांसी की सजा है। उन्होंने इस सजा को अमेरिका की आपराधिक न्याय प्रणाली पर दाग की संज्ञा भी दी। यह पहली ऐसी मौत की सजा थी जो 70 साल में पहली बार एक किशोर को दी गई थी।

 

अंत में…

मीडिया रिपोर्ट में एक गवाह के हवाले से कहा गया कि मौत से पहले बर्नार्ड ने कहा था, ‘मुझे माफ कर दें, यही वे शब्द हैं जो इस वक्त मेरे मेरी भावनाओं को पूरी तरह से व्यक्त कर सकते हैं। मैं उस दिन कैसा महसूस कर रहा था, बस इन्हीं शब्दों से बयां कर पाऊंगा। वे सजा सुनाए जाने के दौरान भावशून्य थे, और सहज स्वभाव से अपने मौत के इन्तजार में कटघरे में खड़े थे।

 

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