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साल 2020: यहां जाने क्यों सुर्ख़ियों में रहे ये सियासी घटनाक्रम?
दिसम्बर 24, 2020 | By - Abhishek Pandey

साल 2020: यहां जाने क्यों सुर्ख़ियों में रहे ये सियासी घटनाक्रम?

साल 2020 कई बड़ी राजनीतिक घटनाओं का साक्षी रहा है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्रपति चुनाव में हारना और उनकी अपनी हार को स्वीकार ना करना वहीं अरब और इजराइजल देशों में पहली बार संबंधों को सामान्य करने की नींव को रखना भी पूरे विश्व के लिए एक अचम्भित करने वाला पल रहा।

कोरोना महामारी को लेकर कई देशों का विश्व स्वास्थ्य संगठन पर सवाल खड़ा करना कि उन्होंने चीन का पक्ष लिया। इसके अलावा भारत में भी सियासी उठा-पटक काफी देखने को मिली जिसमें बिहार में सत्ता विरोध के बावजूद भाजपा-जेडीयू गठबंधन का सरकार में फिर से वापस आना और केजरीवाल का लगातार तीसरी बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करना।

ऐसे में अलशॉर्ट्स लाया है पूरा साल भर का कच्चा चिट्ठा जो आप इस ब्लॉग के जरिए जानेंगे। सालभर हुई वैश्विक राजनीतिक घटनाओं पर एक नजर-

1. अमेरिका में बदली सत्ता-

अमेरिका में इस साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में सभी को उम्मीद थी कि डोनाल्ड ट्रंप एकबार फिर से सत्ता में वापस आएंगे लेकिन उनके प्रतिद्वंदी जो बिडेन ने सभी को अचम्भे में डालते हुए राष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत हासिल की। डेमोक्रेट पार्टी से राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बिडेन को जीत के लिए 270 इलेक्टोरल वोट चाहिए थे जिसके बाद उन्हें कुल 284 वोट मिले। इससे पहले जो बिडेन 2 बार अमेरिका के उपराष्ट्रपति भी रह चुके हैं।

2. जब जिद पर अड़ गए थे ट्रम्प-

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद थी कि वह जीत हासिल करेंगे लेकिन हार मिलने पर वह पूरे चुनाव में धांधली का आरोप लगाने लगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने फेडरल कोर्ट तक जाने की भी धमकी दी हालांकि मिशीगन औऱ जॉर्जिया में उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया।

3. इजराइल और अरब देशों का याराना-

अभी तक इजराइल और अरब देशों के बीच किसी तरह का राजनयिक संबंध नहीं थे। लेकिन साल 2020 का यदि इसे सबसे बड़ी सियासी घटना के तौर पर माना जाए तो इसमें अतिशयोक्ति नहीं होगी। अमेरिका के हस्तक्षेप की वजह से पहले इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच पहली बार सीधी उड़ानों को संचालित किया गया और भी कई क्षेत्रों में दोनों देश साथ मिलकर काम करने को लेकर सहमति दी। इजराइल का यूएई के अलावा बहरीन और मोरक्को से भी संबंध सामान्य हुए हैं।

4.ब्रेक्सिट डील की उठा-पटक-

यह समझौता पूरे विश्व के लिए एक भ्रम की तरह है क्योंकि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच अभी तक यह समझौता एक मत पर नहीं आ सका। साल 2020 में इस समझौते को लेकर कई बार बैठकें हुई लेकिन दोनों नेताओं के बीच एक मत ना होने की वजह से यह लगातार टलता जा रहा है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन अब यूरोपीय संघ का किसी भी तरह से हिस्सा नहीं रहेगा।

5.जनवरी 2021 में होगा तय ब्रेक्सिट समझौता-

कभी डील तो कभी नो-डील ब्रेक्सिट समझौते से सभी असमंजस की स्थिति में है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान ब्रिटेन को ही उठाना पड़ रहा है। 1 जनवरी 2021 से इस समझौते को किसी भी परिस्थिति में लागू किया जाना है जिसके लिए दोनों नेताओं को एक सहमति पर आना होगा लेकिन ऐसा लगता है कि यह मामला एक कड़वाहट के साथ ही खत्म होने वाला है।

6. कोरोना और चीन पर संदेह-

कोरोना महामारी का सबसे पहला मामला चीन में मिला था, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन का तत्काल इस पर एक्शन ना लेने की वजह से यह संक्रमण पूरे विश्व में काफी तेजी के साथ फैल गया और चीन का भी इस बात से लगातार इनकार करना कि वह इस महामारी का दोषी नहीं है, इसके चलते कई देशों के प्रमुखों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर लगातार सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर अपना गुस्सा निकालते हुए अपने सभी रिश्ते खत्म करने तक की धमकी दी वहीं दुनिया के लगभग 62 देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन के खिलाफ महामारी को लेकर गुस्सा दिखाया।

7. भारत-चीन का सीमा विवाद-

भारत और चीन के बीच साल 2020 में रिश्ते बेहद नाजुक दौर से गुजरते हुए देखे गए हैं। इससे पहले साल 1962 में दोनों देश जंग के मैदान में आमने-सामने आ चुके हैं वहीं 1965 औक 1975 में दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें देखने को मिली। इस साल जून के महीने में लद्दाख की गलवान घाटी में एलएसी के पास एकबार फिर से दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें चीन और भारत के सैनिक शहीद भी हुए। इस मुद्दे को लेकर अमेरिका सहित कई देशों ने भारत का साथ दिया वहीं चीन भी लगातार उस क्षेत्र को अपना बताता रहा।

8.ईरान सैन्य कमांडर सुलेमानी की हत्या-

ईरान के सैन्य कमांडर सुलेमानी की अमेरिकी हवाई हमले में हत्या कर दी गई थी। सुलेमानी ईरान की बहुचर्चित कुद्स फोर्स के प्रमुख थे। यह सेना ईरान द्वारा विदेशों में चल रहे सैन्य ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए जानी जाती है। सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार भी माना जाता रहा है।

9.सूडान के लिए राहत की खबर-

अमेरिका ने अफ्रीकी देश सूडान को इस साल बड़ी राहत देते हुए राज्य प्रायोजित आतंकवाद की लिस्ट से हटाने का फैसला किया। इस फैसले के पीछे इजराइल के साथ राजनीतिक मान्यता देने के बदले अमेरिका ने सूडान को यह तोहफा दिया है।

10.मोरक्को के विवादित नक्शे को मान्यता-

इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने पर सहमति देने के स्वरूप मोरक्को को अमेरिका ने बड़ा तोहफा देते हुए उसके विवादित नक्शे को मान्यता दी। अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित वेस्टर्न सहारा जो सहारा मरूस्थल का पश्चिमी हिस्सा है इस पर एक समय स्पेन का कब्जा था, लेकिन 1975 में वेस्टर्न सहारा के करीब बसे मोरक्को ने अपना कब्जा कर लिया था। लेकिन अमेरिका ने उसके इस विवादित नक्शे को मान्यता अभी तक नहीं दी थी, जिसके चलते इजराइल के साथ समझौता करने के स्वरूप उसे यह अब बड़ा तोहफा मिला है।

11.जापान के पीएम शिंजो आबे का इस्तीफा-

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। पिछले काफी लम्बे समय से बीमार चलने की वजह से उन्हें कई बार अस्पताल में भी भर्ती करना पड़ा था। हालांकि, प्रधानमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल सितम्बर 2021 को पूरा होना था। शिंजो आबे जापान के प्रधानमंत्री के तौर 2803 दिन तक सत्ता पर रहे जो एक रिकॉर्ड है।

12.ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंधों में खटास-

ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंधों में इस साल काफी खटास देखने को मिल रही है। दरअसल कैनबरा ने कोरोना महामारी की उत्पत्ति की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच का प्रस्ताव देकर बीजिंग को क्रोधित कर दिया था। जिसके चलते चीन ने अरबों डॉलर के ऑस्ट्रेलियाई निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिए। वहीं ऑस्ट्रेलिया की संसद में एक नए कानून को भी पास किया गया जिसके बाद विदेशी देशों के साथ कैनबरा के समझौतों को विदेश नीति का हवाला देते हुए खत्म किया जा सकेगा।

13.अजरबैजान और अर्मीनिया की जंग-

साल 2020 में दुनिया को अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच भीषण जंग भी देखने को मिली। दोनों देशों के बीच विवादित क्षेत्र नागोर्नो काराबाख को लेकर संघर्ष की स्थिती देखने को मिली। अर्मीनिया और अजरबैजान के बीच यह जंग लगभग 6 सप्ताह तक चली।

14.नेपाल में संसद भंग-

साल के अंतिम महीने में नेपाल की सत्ता में बड़ा भूचाल देखने को मिला जब देश के प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा ने राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से संसद को भंग करने का प्रस्ताव भेजा। जिसके बाद राष्ट्रपति ने उनकी इस सिफारिश को स्वीकार करते हुए संसद को भंग कर दिया है। अब नेपाल में साल 2021 में अप्रैल और मई के महीने में मध्यावधि चुनाव होंगे।

15.ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सेंसर की कैंची-

कोरोना महामारी के दौरान ओटीटी प्लेटफार्म पर दुनियाभर के लोगों ने अपना सबसे ज्यादा समय व्यतीत किया है। जिसके चलते इसमें मौजूद कंटेट को लेकर भी कई देशों में शिकायतों का एक दौर सा देखा गया। जिसके बाद भारत सही कई देशों में ऑनलाइन कंटेट को लेकर सेंसरशिप को लागू करने का प्रस्ताव पारित किया ताकि ओटीटी पर आने वाली फिल्मों पर भी नजर रखी जा सके।

16. 9 बजे 9 मिनट!

कोरोना संकट काल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों से 5 अप्रैल को ट्वीट करते हुए एक खास अपील की थी। इस अपील में उन्होंने कोरोना वॉरियर्स को सलाम करने के लिए रात 9 बजे 9 मिनट तक दीप जलाने के लिए कहा था। जिसके चलते पूरे देश में दीपावली जैसा माहौल देखने को मिला था। पीएम का यह ट्वीट भारत में इस साल सबसे ज्यादा रीट्वीट करने के मामले में सबसे पहले स्थान पर आ गया। इस ट्वीट को लोगों ने 1 लाख 18 हजार बार रीट्वीट किया।

17.मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन-

इस साल मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन देखने को मिली जिसमें बेहद मामूली बहुमत के सहारे चल रही कमलनाथ सरकार को मार्च महीने में झटका लगा। इसके पीछे कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का भाजपा में शामिल होना था। जिसके चलते कांग्रेस पार्टी के 25 विधायकों ने बगावत करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके एक महीने के बाद मध्यप्रदेश की सत्ता में एकबार फिर से शिवराज सिंह चौहान की वापसी देखने को मिली। वहीं उपचुनाव में भी भाजपा के खाते में 19 सीटें गई।

18.भारत में प्रवासी मजदूर सड़कों पर-

कोरोनाकाल के दौरान लगे लॉकडाउन की वजह से अचानक भारत में एक असमंजस की स्थिति देखने को मिली जिसके चलते अपने घर से दूर रहने वाले लोग बिना किसी साधन के पैदल ही सड़कों पर निकल पड़े थे। जिसके बाद भारत सरकार को काफी कशमकश करनी पड़ी और इन सभी प्रवासियों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन, बसों कों संचालित किया गया।

19.एलेक्सेई नवालनी को विमान में जहर-

रूस के विपक्षी नेता एलेक्सेई नवालनी को जहर देने की खबर सुर्ख़ियों में रही। जहां इसका इल्जाम सीधा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर लगा। ख़बरों के अनुसार, नवालनी को पेय पदार्थ में मिलाकर जहर दिया गया था। इसके बाद वहां कि सियासत गरमा गई थी। इसके बाद वे कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे, जहां के डॉक्टर्स पर भी कई समाजसेवियों ने आरोप लगाया था कि नवालनी को सही समय पर चिकित्सा उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। गौरतलब है कि हाल ही में नवालनी ने दावा किया है कि उन्हें जहर देने वाले सीक्रेट एजेंट को उन्होंने ढूंढ लिया है।

20. भारत में सड़कों पर अन्नदाता-

देश में हुआ किसान आंदोलन भी साल की सबसे बड़ी सुर्ख़ियों में रहा, इस दौरान यहां की भाजपा सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के किसान राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर बैठ गए। विपक्षी पार्टियों ने भी इस मौके को जमकर भुनाया। ताजा जानकारी के अनुसार अभी भी किसान दिल्ली की सीमाओं पर जमे हैं। विवादित बिलों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। इसके चलते विदेशों में भी कई प्रदर्शन हुए थे और कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भी इस संबंध में टिप्पणी की थी।

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