अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 2021: कोरोनाकाल में धरती पर देवदूत है नर्स!
मई 11, 2021 | By - Vaibhav Sharma

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 2021: कोरोनाकाल में धरती पर देवदूत है नर्स!

पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी की वेव को झेल रही है, ऐसे में हम लोगों को सहारा देने मेडिकल वर्ग का एक बहुत बड़ा तबका जुटा हुआ है। आए दिन हम कई किस्से कहानियां सुनते हैं, जिसमें डॉक्टर्स और नर्सों ने अग्रिम मोर्चे पर कोरोना से हमारी सुरक्षा की है। आज एक खास दिन भी है जिसके चलते हमें नर्सों और नर्सिंग कर्मियों को याद करना बेहद आवश्यक है। दोस्तों आज अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (International Nurses Day 2021) है, जिसे पूरी दुनिया में एक खास तबके को समर्पित किया जाता है।

आज आप जानेंगे इस पद की और इस दिन को मनाए जाने की कहानी।

दुनियाभर में हर साल ठीक 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस ( Why celebrate International Nurses Day 2021) मनाया जाता है। साल 2021 में नर्स दिवस की थीम नर्स: नेतृत्व की आवाज-भविष्य की स्वास्थ्य सेवा दृष्टि  (Nurses: A Voice to Lead– A Vision for future healthcare)रखा गया है।

International Nurse Day 2021

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर जरा इतिहास की ओर चले…

दरअसल, यह शुरुआत पहली बार अमेरिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण विभाग के अधिकारी डोरोथी सदरलैंड (Dorothy Sunderland) ने दिया था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डी.डी. आइजनहावर (President Dwight D. Eisenhower) ने इसे मनाने की आज्ञा प्रदान की। इस दिन को पहली बार 1953 में मनाया गया था। अंतरराष्ट्रीय नर्स परिषद ने इस दिवस को पहली बार वर्ष 1965 में मनाया। नर्सिंग पेशेवर की शुरूआत करने वाली प्रख्यात ‘फ्लोरेंस नाइटइंगेल’ के जन्म दिवस 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में मनाने का फैसला साल 1974 में लिया गया था। जिसके बाद इसे लगातार मनाया जा रहा है।

Florence Nightingale

दुनिया की सबसे पहली नर्स ‘नाइटइंगेल’

  • फ्लोरेंस नाइटिंगेल को ही दुनिया की पहली नर्स माना जाता है।
  • उन्हीं के जन्मदिन को ‘अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे’ यानी नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • उन्होंने जंग में घायल हजारों लोगों की जान बचाई थी, उन्हें देवदूत भी माना जाता है।
  • 1844 में उन्होंने पूरी तरह से ये तय कर लिया कि उन्हें नर्सिंग के पेशे में ही जाना है और लोगों की सेवा करनी है।
  • 1854 में उन्हें 38 नर्सों के साथ घायलों की सेवा के लिए तुर्की भेजा गया।
  • उनके सेवा कार्यो के लिए उन्हें ‘द लेडी विद द लैंप’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
  • वे रात को भी हाथ में मशाल लिए घायल मरीजों की सेवा करने चली जाती थीं।
  • फ्लोरेंस को ब्रिटेन की सरकार ने ‘ऑर्डर ऑफ मेरिट’ के सम्मान से नवाजा गया था।
  • वर्ष 1910 में 90 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया।

Nurse day in india

अभी ‘नर्सिंगकर्मी’ ही फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स

दुनियाभर में फिलहाल कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है, ऐसे में नर्सिंगकर्मी ही फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस साल का नर्स दिवस वाकई में इन योद्धाओं को समर्पित होगा। हर मोर्चे पर नर्स चाहे पुरुष हो महिला सभी ने डट कर हमें बचाने के लिए इस महामारी का सामना किया है।
नर्सिंग को सबसे बड़े स्वास्थ्य पेशे के रूप में माना जाता है। शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जैसे सभी पहलुओं के माध्यम से रोगी की देखभाल करने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित और अनुभवी होना जरूरी है। आज कोरोना महामारी के समय में नर्सेज भी अपनी भूमिका को तत्परता से निभा रहे हैं और रोगियों की अच्छी तरह देखभाल कर डॉक्टरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सेवाएं दे रही है।

लन्दन में ऐसे मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस

हर साल 12 मई के दिन लंदन के वेस्टमिंस्टर एब्बे में एक कैंडल लैंप सेवा का आयोजन होता है। यह कैंडल लैंप एक नर्स से दूसरी नर्स को सौंपा जाता है, इसके पीछे तथ्य यह है कि इस ज्ञान को एक नर्स से दूसरी नर्स के पास भेजा जाता है। सेंट मार्गरेट चर्च में ही फ्लोरेंस नाइटिंगेल को दफन किया गया था, उनके जन्म-दिन के उपलक्ष्य में इसी चर्च में एक विशाल समारोह का आयोजन किया जाता है।

अमेरिका और कनाडा में पूरे सप्ताह इसे राष्ट्रीय नर्सिंग सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में इस पूरे सप्ताह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का प्रदर्शन किया जाता है। इस कार्यक्रम में नर्सों को डॉक्टर्स, प्रशासकों और रोगियों द्वारा सम्मानित किया जाता है।

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