वेलेंटिना मिओज़ो: नो मैन्स लैंड में लॉकडाउन बिताने वाली महिला की पूरी कहानी!
जून 13, 2021 | By - Vaibhav Sharma

वेलेंटिना मिओज़ो: नो मैन्स लैंड में लॉकडाउन बिताने वाली महिला की पूरी कहानी!

इस कोरोना काल में सबसे ज्यादा प्रयोग आने वाले शब्द हैं, लॉकडाउन और क्वारेंटीन। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कोई इन्हें इतना सीरियस ले लेगा कि ऐसी जगह चला जाए ‘जहां ना बंदा ना बन्दे की जात।’ जी हां, ऐसा वाकिया हुआ है और इंटरनेट पर बवाल मचा रहा है। यह किस्सा है इटली की रहने वाली वेलेंटिना मिओज़ो (Valentina Miozzo) का, जो घूमने की शौक़ीन हैं और जैसे ही उन्हें लॉकडाउन की सूचना मिली उन्होंने ऐसी जगह चुनी जहां जाने के लिए आप 10 बार सोचेंगे। उन्होंने नार्वे से बेहद दूरी पर स्थित उत्तर में आर्कटिक सर्कल (Arctic Circle) के लिए निकल पड़ी।

Valentina in Lockdown

बकौल वेलेंटिना- मैं पिछले साल हुए लॉकडाउन से ऊब चुकी थी और वैसे भी कई महीनों से घर से दूर थी। मैं एकांतवास चाहती थी और अपनी कुछ नई योजनाओं को भी अमल में लाना चाहती थी। अकेलेपन में ही यह संभव था और मैंने आर्कटिक सर्कल पर जाने का निर्णय किया। मैं लगातार महामारी पर भी नजर बनाए हुए थी, मुझे यही रास्ता बेहद रोमांचित लगा।

कैसे हुई वेलेंटिना मिओज़ो के सफर की शुरुआत

इटली में लॉकडाउन बेहद कठोर था, वे घूमने की आदी थी और उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे उनके पैरों में बेड़ियां हों। उन्होंने बताया कि वे पिछले लॉकडाउन को झेल चुकी थी और काफी उदास महसूस कर रहीं थीं। अचानक एक दिन ब्लॉगिंग करते हुए उन्हें इंस्टाग्राम पर एक सन्देश मिला। जिसमें उन्हें आर्कटिक सर्कल (Arctic Circle) पर एक गेस्ट हाउस चलाने के लिए न्यौता दिया गया था। वे कहती हैं उस वक्त वे उछल पड़ी और उनके पैरों को पंख लग गए थे।

Arctic Circle

वेलेंटिना कहती हैं- क्या इस प्रस्ताव के बाद मुझे घबराना चाहिए था? हर आम इंसान ऐसे ऑफर के लिए सोच में पड़ सकता है। वजह यह कि कोई भी ऐसी जगह पर नहीं जाना चाहेगा जहां जीवन बेहद मुश्किल हो। यह कोई सिरफिरा ही कर सकता है। यकीन मानिए मुझे कुछ इसी तरह की मिश्रित भावनाएं (Mix Feelings) महसूस हो रहीं थीं। मैंने इसे सबसे अच्छा अवसर माना और एक अनजानी जगह पर जाने के लिए हामी भर दी, जिसके बारे में केवल मैंने कहानियों में सुना था।

 

आखिर वो दिन आ गया…

उन्होंने दो दिनों में ही इस ऑफर को स्वीकार कर लिया। जिसके ठीक एक महीने बाद वे 2400 मील दूर कोंग्सफजॉर्ड पहुंची। ये मिओजो के लिए बिल्कुल नया अनुभव था क्योंकि कोंग्सफजॉर्ड में सिर्फ 28 निवासी रहते हैं और यहां इटली की तरह ऊंची-ऊंची इमारतें नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पास सुपरमार्केट 25 मील दूर है, सबसे पास अस्पताल 200 मील दूर है और एक छोटा सा स्थानीय एयरपोर्ट 25 मील की दूरी पर है। उनके लिए यह बेहद रोमांचक अवसर था।

Nights in Arctic
24 घंटों की रातें…

  • वे अपने अनुभव को साझा करते हुए कहतीं हैं कि सर्दियों में सिर्फ 75 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवा और चारों ओर बर्फ होती है इसलिए कहीं भी जाना मुश्किल होता है।
  • जब तक सड़कें साफ रहती हैं स्थानीय लोग हफ्ते में सिर्फ दो दिन जरूरत का सामान लेने के लिए बाहर निकलते हैं।
  • उनके जाने के कुछ समय बाद ही ध्रुवीय रातें आ गईं।
  • जिसमें दिन में भी रात जैसा माहौल रहता था।
  • शरीर सोचने को मजबूर हो गया था कि किस वक्त सोया जाए।
  • हालांकि, वे इससे पहले से ही परिचित थीं।
  • यह मौसम लगभग 2 महीने तक रहा।

कैसा रहा वेलेंटिना का अनुभव

उन्होंने बताया कि किसी भी अन्य देश से इस जगह कि तुलना करना बेहद आसान हो जाता है जब आप यहां थोड़ा समय व्यतीत करते हैं। यहां बर्फ की चादर है, प्रकाश है तो अन्धकार भी है। यह एकदम जंगली जीवन की तरह है जहां आपको सर्वाइव करना होता है। यहां पौधे नाम मात्र के हैं, लेकिन जितने भी हैं किसी ना किसी तरह से जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग आते हैं। यहां व्हेल, डॉल्फिन, सीबर्ड्स हैं, इन्हें बेहद करीब से जाना जा सकता है।

बिना मास्क के रहीं वेलेंटिना मिओज़ो

उन्होंने कहा कि यहां कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया था, टुंड्रा प्रदेश पूरा ही कोरोना मुक्त था। जबकि नार्वे में बहुत अधिक प्रतिबन्ध थे। मैं यहां लगभग 7 महीनों तक बिना मास्क के रही, लगभग सामान्य जीवन के साथ।

corona free arctic

अंत में…
एक महिला होते हुए उनका ऐसी जगह पर रहने का चुनाव वाकई में काबिले तारीफ है। ट्रेवल ब्लॉगर होने के साथ-साथ उन्होंने अपने अनुभव में टूरिज्म का भी जिक्र किया है। उनका मानना है कि सच में महामारी ने इस सेक्टर में काफी बदलाव ला दिए हैं। उन्होंने कहा अपने अनुभव के आधार पर कह सकती हूं कि ऐसे हालत पहले कभी नहीं देखे थे।

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