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इस्लाम में खास होती है जकात, जानिए क्यों है जरूरी?
मई 6, 2021 | By - Gaurav Sen

इस्लाम में खास होती है जकात, जानिए क्यों है जरूरी?

हम सभी जानते हैं रमदान के पाक महीने में मुस्लिम रोजे रखते हैं और 30 दिनों तक अल्लाह की विशेष इबादत करते हैं। जिसमें रोजे, नमाज के साथ-साथ जकात भी को सबसे आगे तरजीह दी जाती है। जकात (दान) को रमदान के दौरान मुस्लिमों में खास तौर पर प्रमुखता पर रखा जाता है। रोजा-नमाज और कुरआन की तिलावत (कुरआन पढ़ने) के साथ यह दी जाती है। जकात को इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक माना जाता है। इस्लाम में अपनी कमाई का 2.5 फीसदी हिस्सा दान में देना जरूरी कहा गया है।

पहले जानते हैं क्या है जकात?

ऐसा कहा जाता है कि रमदान के महीने में हर मुस्लिम को अपनी हैसियत के हिसाब से दान देना चाहिए। ईद से पहले जकात अदा करने की परंपरा है। यह खासकर गरीबों, विधवा महिलाओं, अनाथ बच्चों या किसी बीमार व कमजोर व्यक्ति को दी जाती है। इसमें गहनों से लेकर खाद्य वस्तुएं सहित कई सारी जरूरत की चीजें शामिल होती हैं।

घर में जितने भी कमाने वाले हैं सभी देते हैं दान

इस्लाम के अनुसार यदि किसी घर में 5 सदस्य हैं तो उन्हें अपनी कमाई से दान देना जरूरी बताया गया है। चाहे वह नौकरी करे या व्यापार, सभी को जकात देना अनिवार्य है। कहा गया है कि इसके बारे में पैगंबर मोहम्मद ने फरमाया है, ‘जो लोग रमदान के महीने में जकात नहीं देते हैं, उनके रोजे और इबादत कुबूल नहीं होती है, बल्कि धरती और जन्नत के बीच में ही रुक जाती है।

जकात जैसी ही होती है फितरा

जकात को रोजे और नमाज की तरह आवश्यक कहा गया है कि लेकिन फितरा में ऐसा नहीं होता। फितरा में व्यक्ति अपनी मर्जी से कितना भी दान कर सकता है। जिसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि रमदान महीने के अलावा भी जरूरतमंदों को हमेशा मदद मिलती रहे। रमदान के दौरान फितरा को ईद की नमाज से पहले इसका अदा करना जरूरी होता है। इस तरह अमीर के साथ ही गरीब की साधन संपन्न के साथ ईद भी मन जाती है। फितरे की रकम भी गरीबों, बेवाओं व यतीमों और सभी जरूरतमंदों को दी जाती है। इस सबके पीछे सोच यही है कि ईद के दिन कोई खाली हाथ न रहे, क्योंकि यह खुशी का दिन है।

कोरोना महामारी में बदला जकात का तरीका

पूरे विश्व में कोरोना महामरी का दौर चल रहा है। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर भीड़ इकठ्ठा कर जकात करने पर सभी देशों में मनाही है। रमदान का महीना है, जकात भी करना है, जरूरत मंदों को मदद पहुंचाना है। इसके लिए ऑनलाइन सुविधा का सहारा लिया गया है। खाड़ी देशों की बात करें तो संयुक्त अऱब अमीरात में जकात फंड ने विदेश मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय (एमओएफएआईसी) के साथ मिलकर दान कार्य को बढ़ावा देने और सरकारी संस्थाओं के बीच साझेदारी को बढ़ाने के लिए समझौता किया है। इस साझेदारी के जरिए विदेशों में रह रहे यूएई के नागरिकों को जकात देने में आसानी रही है।

वहीं, स्मार्ट दुबई ने रमदान के पवित्र महीने के लिए सरकारी सेवा DubaiNow पर एक नई और सुरक्षित ज़कात भुगतान सेवा यूएई ज़कात फंड के साथ हाथ मिलकर शुरु की है। जिसमें उपयोगकर्ताओं को इस्लामिक शरिया कानून के अनुसार उनकी ज़कात राशि की गणना करने की सुविधा मिलेगी और फिर पूरी राशि या उसके हिस्से का भुगतान करने में सहायता मिल रही है।

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