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अगली बार जीन्स खरीदने से पहले आप 10 बार सोचेंगे!
मई 7, 2021 | By - नितिन सिंह भदौरिया

अगली बार जीन्स खरीदने से पहले आप 10 बार सोचेंगे!

जीन्स (Jeans) दुनियाभर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले परिधानों में से एक है। कोई पार्टी हो या आपकी जिंदगी का कोई खास दिन, हर मौके के लिए बाजारों में कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। पहनावे के तौर पर जीन्स जितनी लोकप्रिय है उतनी ही आरामदेह  भी, शायद यही वजह है कि हर मौके पर लोग जीन्स को इतनी तरजीह देते हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि आप जो जीन्स पहनते है वह पर्यावरण (Environment) को कितना प्रभावित करता है। आज के समय में सबसे ख़ास मुद्दा ही पर्यावण संरक्षण (Environment Protection) है। इसे लेकर कई देश बड़ी-बड़ी मुहीम चला रहे हैं। यही नहीं ग्रेटा थन्बर्ग (Greta Thanberg) और लिसीप्रिया कंगुजम (Lisipria Kangjuam) जैसे नन्हे बच्चे भी इस मुहीम को लेकर देशव्यापी प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। दोस्तों, छोटी-छोटी कटौतियां ही हमें हमारी पृथ्वी को बचाने में मदद करेंगीं। आज यह महज एक जीन्स का मुद्दा नहीं बल्कि इसके पीछे का इतिहास है जो कहीं न कहीं हमारी पृथ्वी को दीमक की तरह खा रहा है।

एक नई जीन्स मतलब 10 हजार लीटर पानी व्यर्थ

एक जीन्स तैयार करने में खर्च होता है हजारों लीटर पानीहोता है

बाजार से एक जीन्स (Jeans) खरीदने का मतलब है कि आपने पानी के नल को 21 घंटे तक खुला छोड़ दिया, जिससे लगातार पानी बह रहा है। दरअसल, जो जीन्स हम पहनते हैं वो कॉटन (Cotton)से बनता है और कॉटन उगाने के लिए हमें बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। एक अध्ययन में बताया गया कि एक जीन्स को तैयार करने में तकरीबन 10 हजार लीटर पानी खर्च होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा दौर में दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष करीब 2 अरब जीन्स खरीदी जाती हैं। इन आंकड़ों से आप खुद की अंदाजा लगा सकते हैं कि हम 2 अरब जीन्स को तैयार करने के लिए कितने लीटर पानी बहाते हैं।

क्या हमेशा से लोगों में है जीन्स की लोकप्रियता?

अगर आप सोचते हैं कि जीन्स को लेकर लोगों में हमेशा से ही ऐसी लोकप्रियता थी तो आप गलत सोचते हैं क्योंकि जीन्स के आविष्कार के कई सालों बाद तक इसका इस्तेमाल सिर्फ मजदूर और गरीब करते हैं। वहीं आर्थिक रूप से संपन्न लोग इसे पहनने से परहेज करते थे। दरअसल, जींस का अविष्कार 19 वीं सदी में फ्रांस के शहर NIMES में हुआ था, जिस कपडे़ से जीन्स बनी है उसे फ्रेंच में ‘Serge’ कहते हैं और इसे नाम दिया गया ‘Serge de Nimes’। मौजूदा दौर की तरह उस समय भी शायद लोग अपनी सहूलियत के लिए बड़े-बड़े नामों का शॉर्ट फॉर्म ढूंढते थे तभी तो कुछ ही दिनों बाद लोगों ने ‘Serge de Nimes’ को Denims (डेनिम्स) कहना शुरू कर दिया। समय के साध धीरे-धीरे डेनिम्स पूरे यूरोप में पॉपुलर हो गई। इसे सबसे ज्यादा सेलर्स (नाविकों) ने पसंद किया। लोगों ने इन सेलर्स को सम्मान देने के लिए एक निकनेम दिया- जो था जीन्स (Jeans)।

एक समय मजदूरों की पोशाक थी जीन्स

मजदूरों की पोशाक थी जीन्स

 

सबसे पहले कैलिफोर्निया (California)में कोयले की खान में काम करने वाले मजदूरों ने इसे खरीदना शुरू कर दिया क्योंकि इसका कपड़ा बाकी फैब्रिक से थोड़ा मोटा था, जो उनके लिए काफी आरामदायक था और जल्दी गंदा भी नहीं होता था। इसके बाद जल्द ही जीन्स (Jeans) मुख्यधारा की पोशाक बन गई।

एक जीन्स उत्सर्जित करती है इतना CO2 

मशहूर क्लादिंग कंपनी लिवाइस (Levi’s) का कहना है कि उनकी जींस का एक जोड़ा वायुमंडल में करीब साढ़े 33 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) छोड़ता है। हैरानी के बात तो यह है कि ये एक कार से एक हजार किलोमीटर से ज्यादा के सफर के बराबर है। बताया गया कि डेनिम से इतना अधिक CO2 उत्सर्जन की वजह कपड़ों का चीन और भारत में तैयार किया जाना है, जहां बिजली के लिए कोयला एक मुख्य स्रोत है।

डेनिम (Denim) का ट्रेडमार्क नीला रंग सिंथेटिक नील की डाई के जरिए मिलता है, जिसका नाता साइनाइड जैसे जहरीले रसायन से है गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए पैसा न देना पड़े, इसके लिए कंपनियां इन रसायनों को नदियों में डम्प कर देती है। 2019 के एक अध्ययन के दौरान बांग्लादेश में फैक्ट्रियों से निकले टेक्सटाइल डाई के अंश, पास ही उगाई जा रही फसलों में पाए गए थे। मतलब साफ है कि नदियों से यह रसायन हमारे खेतों में पहुंच रहा है। जिसका असर हमारी फसलों और सेहत दोनों को प्रभावित कर रही हैं।

जीन्स को धोना कितना सही है ?

जीन्स को धोने कितना सही है

विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार जब हम जीन्स (Jeans) धोते हैं तो औसतन नब्बे लाख प्लास्टिक माइक्रोफाइबर्स पर्यावरण में घुल जाते हैं। हम जिस तरह अपने कपड़े धोते हैं, ये पर्यावरण और हमारे कपड़ों को भी प्रभावित करता है, लेकिन हम अपने कपड़ों को जितना ज़्यादा धोते हैं, उतने ही ज़्यादा माइक्रोफाइबर्स पर्यावरण में रिलीज़ होते हैं

एक अध्ययन के मुताबिक जीन्स जब धोई जाती है, तो उसमें से सूक्ष्म रेशे निकलते हैं और ये व्यर्थ पानी के साथ बहकर नदियों, झीलों या अन्य जलस्रोतों में पहुंच जाते हैं और प्रदूषण का कारण बनते हैं। रिसर्च में वैज्ञानिकों ने जलस्रोतों की तलछट में मिले कई सूक्ष्म रेशों का परीक्षण कर पता किया कि वो जीन्स से निकले सूक्ष्म कण ही हैं।

धोने से ज्यादा झाड़ना बेहतर

जीन्स न धोने का क्या है विकल्प

एनवॉयर्नमेंटल चैरिटी रैप के अभियान ‘लव योर क्लोथ’ से जुड़ीं सारा क्लेटन ने एक साक्षात्कार में कहा,  जींस को धोना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें झाड़ना बेहतर होता है। अगर जीन्स में कोई दाग लगा है तो दाग वाली जगह को पानी से साफ़ करना चाहिए, न कि पूरी जींस को धोना चाहिए।

लिवाइस सीईओ ने कभी नहीं धोई अपनी जीन्स

लिवाइस के सीईओ चिप बर्ग क्यों नहीं धोते अपनी जीन्स

जीन्स को बिना धोए पहनना आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन जींस (Jeans) बनाने वाली कंपनी लिवाइस (Levi’s) के सीईओ चिप बर्ग (Chip Bergh) भी इससे सहमत हैं। बर्ग ने साल 2014 में बताया था कि उन्होंने अपनी जींस कभी नहीं धुली है तो लोगों की ओर से अजीब प्रतिक्रियाएं आई थीं। इसके पांच साल बाद यानि मार्च 2019 में जब उनसे उनकी जीन्स धोने को लेकर सवाल किया गया तो बर्ग ने बताया कि उन्होंने अपनी वो जीन्स (Jeans) आज तक नहीं धोई, जो अब करीब 10 साल पुरानी हो चुकी है।

इस समझौते से बचेगा अरबों लीटर पानी

क्या है डेनिम समझौता

अक्टूबर 2020 में गैर लाभकारी संगठन, द हाउस ऑफ डेनिम के सह संस्थापक जेम्स वीनहॉफ ने ऐम्सटर्डम में एक डेनिम (Denim) समझौते की अगुआई भी की, जिसमें टॉमी हिलफिगर जैसे 30 नामीगिरामी डेनिम ब्रांडों ने 2023 तक नीदरलैंड्स में 20 प्रतिशत तक रिसाइकिल किए हुए फैब्रिक से कम से कम तीस लाख डेनिम उत्पाद बनाने की प्रतिबद्धता पर दस्तखत किए थे। नीदरलैंड्स के बाजार में हर साल 2 करोड़ 30 लाख डेनिम चीजें बिक जाती हैं। अब इस डेनिम समझौते (Denim Agreement) के तहत 15 अरब लीटर से ज्यादा पानी बचा लेने का लक्ष्य रखा गया है। इससे जीन्स से पर्यावरण (Environment) पर होने वाले प्रभाव से कुछ हद तक राहत मिलेगी।

उम्मीद है कि अब आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे कि जीन्स (Jeans) अपने निर्माण से लेकर उपयोग तक हर चरण में किस तरह से पर्यावरण को प्रदूषित (Environmental Pollution)करता है। इसमें कमी लाने के लिए हमें ब्लॉग में विषेज्ञषों द्वारा बताई बातों पर गौर करने की जरूरत है।

AlShorts लगातार ऐसे ही विषयों पर आपको दिलचस्प जानकारी उपलध करवाता रहेगा। हमारे साथ जुड़े रहें और पढ़ते रहिए देश और दुनिया से जुड़े रोचक ब्लॉग्स।

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