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येरुशलम और इजराइल विवाद का कच्चा चिट्ठा यहां पढ़ लीजिए!
मई 10, 2021 | By - Gaurav Sen

येरुशलम और इजराइल विवाद का कच्चा चिट्ठा यहां पढ़ लीजिए!

यहां दुनिया कोरोना से लड़ रही है और दुनिया में कई देशों के बीच विवाद उत्पन्न हो रहा है। आप भी काफी समय से येरुशलम और इजराइल के बीच चल रही खींचतान को लेकर काफी समय से पढ़ रहे होंगे। इस ब्लॉग के जरिए आप जानेंगे कि आखिर किन हालातों में इजराइल और येरुशलम (jerusalem and israel controversy) के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ। यही नहीं केवल Alshorts आपको बताएगा कि इस विवाद के पीछे की वजह क्या है? चलिए फिर शुरू करते हैं, येरुशलम और इजराइल से जुड़ी हर वो जानकारी जो आपको जाननी जरूरी है।

jerusalem and israel controversy mosque

क्या है येरुशलम और इजराइल विवाद

दरअसल, विवाद की वजह अल-अक़्सा मस्जिद (al-Aqsa Mosque) परिसर है, जो पुराने यरुशलम शहर में स्थित है, इसे मुसलमानों की सबसे पवित्र जगहों में से एक माना जाता है। लेकिन यही ठीक इसी जगह पर यहूदियों का पवित्र माउंट मंदिर भी है। ये आज की बात नहीं है बल्कि यहां हिंसा काफी समय से होती आई है। लेकिन, रमज़ान के आख़िरी जुम्मे के मौक़े पर हज़ारों लोग यहां जमा हुए, जिसके बाद हिंसा और इस विवाद ने दुबारा जन्म ले लिया।

रिपोर्ट्स की मानें तो पिछली हिंसाओं और इस बार हुए विवाद में काफी अंतर माना गया है। यह बात है 1967 के समय की, जब मध्य पूर्व युद्ध के बाद इजराइल ने पूर्वी यरुशलम को नियंत्रण में ले लिया था और वो पूरे शहर को अपनी राजधानी मानने लगा था। जबकि दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसका कभी भी समर्थन नहीं किया। ऐसे में इलाके में तनाव बढ़ना लाजमी था, रिपोर्ट के अनुसार, ज़मीन के इस हिस्से पर हक़ जताने वाले यहूदी फलस्तीनियों को बेदख़ल करने की कोशिश कर रहे हैं।

Al-Aqsa Mosque

विवाद के दिन हुआ क्या था?

रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां शुक्रवार की नमाज के बाद एकाएक हजारों लोग एकत्रित हो गए और धर्म विशेष की मान्यताओं के अनुसार यहां विवाद शुरू हो गया था। येरुशलम के अल-अक्सा मस्जिद परिसर के बाहर देर रात सैकड़ों फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों और इजराइल पुलिस में भीषण टकराव हो गया। फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरों व बोतलों से हमला किया। वहीं जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फिलिस्तीनियों पर रबर की गोलियां और ग्रेनेड दागे। दरअसल, विवाद की वजह यहूदी रहवासियों का उस जमीन पर दावा करना है, जहां फिलिस्तीन के लोगों के घर बने हुए हैं। यही वजह है कि फिलिस्तीनी लोग अपने घरों को गंवाने के डर से प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

Jerusalem Day

2016 में भी हो चुकी है विवाद की सुनवाई

इस मामले में अक्टूबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को की कार्यकारी बोर्ड ने एक विवादित प्रस्ताव को पारित करते हुए कहा था कि यरुशलम में मौजूद ऐतिहासिक अल-अक़्सा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा साबित नहीं होता है। यूनेस्को की कार्यकारी समिति ने ये प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अल-अक़्सा मस्जिद पर मुसलमानों का अधिकार है और यहूदियों से उसका कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है। यहूदी उसे टेंपल माउंट कहते रहे हैं और यहूदियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता रहा है।

 

यरुशलम का इतिहास

काशी, मथुरा, अयोध्या, मक्का, गांधार, पेशावर, नालंदा, तक्षशिला, तेहरान, मदीना, बगदाद, मोसुल, रोम, ईजिप्ट, लोनान, एथेंस, उज्जैन, रामेश्वरम और जगन्नाथ की तरह यरुशलम भी प्राचीन और ऐतिहासिक शहर है। यह शहर मूल रूप से यहूदियों का शहर है लेकिन बाद में यह शहर ईसाई और मुस्लिमों के लिए भी पवित्र स्थल बन गया। यहां एक सुलेमानी मंदिर (सिनेगॉग) था जिसके परिसर में अब मस्जिद, चर्च और सिनेगॉग है। यहां पर मुस्लिमों की मस्जिद अल-हरम है जिसे गोल्डन टेम्पल या डोम ऑफ द रॉक कहते हैं।
मध्यपूर्व का यह प्राचीन नगर यहूदी, ईसाई और मुसलमानों का संगम स्थल है। तीनों धर्मों के लोगों के लिए इसका महत्व है इसीलिए यहां पर सभी अपना कब्जा बनाए रखना चाहते हैं। फिलिस्तीन इसे अपनी राजधानी बनाना चाहता था जबकि इजराइल का कहना था कि यह हमारी राजधानी है। इसराइल का एक हिस्सा है गाजा पट्टी और रामल्लाह, जहां फिलीस्तीनी मुस्लिम लोग रहते हैं और उन्होंने इसराइल से अलग होने के लिए विद्रोह छेड़ रखा है।

 

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