क्यों मनाई जाती है ईद-उल-फितर, जानिए यहां?
मई 11, 2021 | By - Gaurav Sen

क्यों मनाई जाती है ईद-उल-फितर, जानिए यहां?

ईद मुस्लिम लोगों का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। रमदान माह के रोजे इस त्यौहार के साथ समाप्त हो जाते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान के बाद शव्वाल की पहली तारीख को यह पर्व मनाया जाता हैं। सुबह की नमाज से इसकी शुरुआत हो जाती है। रमदान की आखरी रात में चांद दिखने के अगले दिन यह त्यौहार मनाया जाता हैं। कोरोना महामारी के दौर की यह दूसरी ईद है। साल 2020 में भी कोरोना के साए में यह मनाई गई थी। रमदान के बाद आने वाली ईद मीठी ईद कहलाई जाती है।

इसे ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है। यहां जानिए कोरोना महामारी के दौर में कैसे मनाएं यह पर्व और इससे जुड़ी बेदह खास बातें।

जानिए क्या होता है ईद उल फितर का महत्व

ईद को लेकर मुस्लिम लोग बेहद उत्साहित रहते हैं। लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है, जिसके कारण इसका इतना महत्व होता है। कहा जाता है कि रमजान महीने के अंत में ही पहली बार कुरान आई थी। मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ।

कहा जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी। इस जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया था। इसलिए इस दिन को मीठी ईद के रुप में मनाया जाता है। इस्लाम में यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। जिसमें से ये पहली ईद है और दूसरी ईद उल जुहा या बकरीद कहलाती है।

सदाक़-अल-फ़ित्र या ज़कात-अल-फ़ित्र

मुसलमान नमाज से पहले सदक़ा-अल-फ़ित्र या ज़कात-अल-फ़ित्र का दान भी करते हैं। यह ज़कात के अनिवार्य वार्षिक दान के अतिरिक्त है, जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है, जिसकी गणना किसी के धन के 2.5 प्रतिशत के रूप में की जाती है।

हालांकि ज़कात का भुगतान वर्ष के किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन मुसलमान रमदान के दौरान इसका भुगतान करना पसंद करते हैं क्योंकि इसके अनुसार अच्छे कर्म पवित्र महीने के दौरान कई गुना बढ़ जाते हैं।

ईद की नमाज़

ईद अल फितर प्रार्थना में दो इकाइयाँ या रकत शामिल हैं। इन्हें नियाह के साथ छह अतिरिक्त तकबीरों (अल्लाहु अकबर) के साथ इमाम के पीछे दो रकात पेश करने की पेशकश की जाती है।


कोरोना महामारी ने बिगाड़ा ईद का मजा

यूं तो इस त्यौहार पर लोग एक दूसरे को मिलकर मुबारकबाद देते हैं। लेकिन पूरे विश्व में फैली इस जानलेवा बीमारी के चलते लोगों के भीड़ इकठ्ठा करने पर रोक लगाई गई है। देशों में कोरोना महामारी के लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है, ऐसे में लोगों से घरों में रहकर ही यह त्यौहार मनाने को कहा गया है। ज्यादा राज्यों में कोरोना से संबंधित सख्त नियम लागू हैं।


अरब देश

वहीं अरब देशों की बात करें तो यूएई में कोरोना फैलने से रोकने के लिए लोगों से घरों में रहने की बात कही गई है। वहीं नमाज के लिए भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। जिसमें कहा गया कि, मस्जिदों के बाहर भीड़ इकठ्ठा नहीं होगी। साथ ही मस्जिदों में भी सीमित संख्या में लोगों को प्रवेश दिए जाएगा। पुलिस की निगरानी में कोरोना नियमों का पालन कराया जाएगा।

क्या बनता है इस दिन?

ईद-उल-फितर जिसे मीठी ईद भी कहते हैं इस दिन सेवईयां हर घर में जरूर बनती हैं। इसके अलावा कई सारे मीठे पकवान बनते हैं। सूखे मेवों की मिठाईयां बनाई जाती हैं। साथ ही कई अन्य पकवान बनाए जाते हैं।

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