Domestic Violence: केवल एक थप्पड़ ही तो था… लेकिन नहीं मार सकता!!!
मार्च 24, 2021 | By - Prashant Sharma

Domestic Violence: केवल एक थप्पड़ ही तो था… लेकिन नहीं मार सकता!!!

केवल एक थप्पड़ ही तो था… लेकिन नहीं मार सकता तो नहीं मार सकता। वर्तमान परिपेक्ष्य में देखें तो हमारे आस-पास कितनी ही महिलाएं हैं जो लगभग प्रत्येक दिन घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का शिकार होती हैं। यह केवल मारपीट ही नहीं बल्कि मानसिक तौर भी प्रताड़ना देना है। कई बार यह आपसी बातचीत ही घरेलू हिंसा का कारण बनती है। सिर्फ यही समाज का ऐसा काला अध्याय है जो हर तरह की सोसाइटी में मौजूद हैं। आज हर वर्ग की महिलाएं इस हिंसा का शिकार हैं। कुछ बता कर अपना मन हल्का कर लेती हैं, तो कुछ बता नहीं पाती और एक एक दिन उनके लिए जीना बेहद मुश्किल हो जाता है। आज AlShorts आपको कुछ ऐसे ही तथ्यों से रूबरू करवाएगा जहां केवल एशिया ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में भी लगातार महिलाओं के साथ हिंसा हो रही है। इस महामारी के दौरान लगे Lockdown में यह हिंसा ना केवल बढ़ गई बल्कि कई महिलाओं ने आत्महत्या को ही अंतिम रास्ता चुना।

domestic violence in lockdown

घरेलू हिंसा बोलने में काफी छोटा शब्द लगता है, लेकिन जब हम इस शब्द के मायने समझने के लिए इसकी गहराई नापने लगते हैं तो एक अथाह समंदर नजर आता है। जरा सोचिए इस हिंसा की गवाह केवल वो चारदीवारें होती हैं जो किसी भी सूरत में गवाही नहीं दे पातीं हैं। इस शब्द को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है जिनमें पति या पत्नी, बच्चों या बुजुर्गों तथा ट्रांसजेंडरों के खिलाफ हिंसा के कुछ उदाहरण प्रत्यक्ष रूप से सामने आए हैं।

Lockdown ने कुछ ऐसे ही जख्मों को हरा किया है, जिसने ये बात साबित कर दी कि आज भी ये समाज घरेलू हिंसा के दंश से मुक्त नहीं हो पाया है। कुछ ऐसे ही बड़े-बड़े देशों में हुई इस हिंसा के आंकड़ों को आज Alshorts आपके सामने रखने जा रहा है, जो चौंकाने के साथ-साथ आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे। हम और आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर सभ्य कहा जाने वाला समाज अंदर से कितना खोखला हो चुका है।

सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है, लेकिन कई देशों में घरों के बंद दरवाज़ों के पीछे लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। वैश्विक तौर पर भी इसे लेकर ऐसी कोई जागरूकता नजर नहीं आती कि हमें यह लगे कि ऐसी हिंसाएं बंद हो जाएंगी।

लॉकडाउन (Lockdown) में घरेलू हिंसा बढ़ने के 4 बड़े कारण

*इसका सबसे पहला कारण था लोगों के साथ हो रहे अत्याचार को वे बाकी लोगों के साथ साझा नहीं कर पा रहे थे। जिससे अपराध करने वाले में भय समाप्त हो गया था।*महामारी के दौरान में लोगों के मन से पुलिस का डर खत्म हो गया था, क्योंकि उस समय सब इस महामारी से निपट रहे थे।
*वहीं घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा होने का सबसे बड़ा कारण लोगों का लगातार घरों में कैद होना भी था, जिसके कारण कुंठा बढ़ती ही जा रही थी।
*एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका कारण शराब बंदी भी बताया गया था, जिसके चलते पुरुषों ने महिलाओं और बच्चों के साथ ज्यादतियां की।

जब Domestic Violence का गढ़ बना गया United States

कहने को तो अमेरिका सबसे शक्तिशाली देशों की लिस्ट में पहले नंबर पर आता है, लेकिन यहां Lockdown के दौरान बढ़े घरेलू हिंसा के मामलों ने इस देश को सच्चाई का आईना दिखाया है। प्रगति के रथ पर सवार इस देश में आपदा के दौरान 8.1 फीसदी घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ। देश में डीसी सेफ नामक एक संस्था ने अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि, लॉकडाउन के दौरान इस हिंसा से जुड़े फोन कॉल की तादाद दोगुनी हो गई। वहीं सबसे ज्यादा मदद कॉल पर शिकागो, वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क के लोगों ने मांगी, जिसमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और ट्रांसजेंडर शामिल थे।

domestic violence in america

* लॉकडाउन के दौरान देश में हर दिन औसतन 951 मामले दर्ज हुए।
*अमेरिका में 4 में से 1 महिला को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है।
*वहीं पुरुषों के मामलों में ये आंकड़ा 7 में से 1 हो जाता है।

एक नजर इन देशों पर भी…

अमेरिका के साथ-साथ बाकी कई ऐसे देशों की लम्बी सूची है जहां लोग अपने घर में ही सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, यहां घर में होने वाली मारपीट मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। भारत से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक दुनिया के हर देश में इन मामलों ने सर उठाया है। जिसके आंकड़े आपको अंदर से झकझोर देंगे, सिलसिलवार तरीके से हम आपको हर देश का लेखा-जोखा बताने जा रहे हैं।

राजशाही का देश ब्रिटेन

हिंसा किसी भी तरह हो सकती है, आप अगर अपने घर में ही सुरक्षित महसूस नहीं करते तो आपको इसके खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है।

domestic violence in United Kingdom

*यहां लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही Domestic Violence हेल्पलाइन पर मदद मागने वालों की संख्या 25 फीसदी बढ़ गई थी।
*साथ ही इस दौरान ऑनलाइन मदद मागने वाले यूजर्स हर दिन के साथ बढ़ रहे थे।
*वहीं लॉकडाउन के दौरान इस हिंसा से कुछ मौत के मामले भी सामने आए।

फ्रांस

यूरोपियन रीजन में बसा फ्रांस भी इससे अछूता नहीं है, आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले साल यहां घरेलू हिंसा के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। कॉउन्सिल ऑफ़ यूरोप एक्सपर्ट ग्रुप ऑन डोमेस्टिक वॉयलेंस (GREVIO) ने यहां तक कह दिया था कि देश में महिलाओं और बच्चों पर होने वाली हिंसा के खिलाफ कड़े कानून बनाना अनिवार्य हो चुका है।

domestic violence in france
*घरेलू हिंसा का सबसे ज्यादा असर पेरिस में देखने को मिला, यहां घर में लॉक होने के कारण इस हिंसा के मामलों में 36% का इजाफा हुआ।
* अगर बात करें पूरे देश की तो, ये आंकड़ा 30 प्रतिशत से ज्यादा देखने को मिला।
*साथ ही सरकार ने इस हिंसा से पीड़ित लोगों के लिए आपदा के दौरान ड्रॉप-इन केंद्रों का भी इंतजाम किया था, जहां लोग सरकार के खर्च पर रह सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया भी अछूता नहीं

ऑस्ट्रेलिया भी घरेलू हिंसा के मामले में काफी गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। हालांकि, यहां पर इसे लेकर समय-समय पर महिलाओं द्वारा कई बैठकें आयोजित की जाती रहीं हैं, लेकिन यह बेहद गंभीर मुद्दा है। वो भी ऐसे समय में जब ऑस्ट्रेलिया की संसद में अश्लील हरकत होने और महिला छेड़छाड़ का मामला सामने आया हो।

domestic violence in australia
*यहां Google सहित कई सर्च इंजनों पर घरेलू हिंसा से बचने के लिए और मदद की जानकारी को सबसे ज्यादा सर्च किया गया।
*वहीं सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 करोड़ आस्ट्रेलियाई डॉलर इस हिंसा से निपटने के लिए भी जारी किए थे।
*साथ ही यहां अलग-अलग माध्यमों से हिंसा से जुड़ी परेशानियां भी जानी गई थी।

भारत में हर वर्ग की महिला है पीड़ित Domestic Violence से

दुनिया की सबसे ज्यादा दूसरी आबादी वाले देश में कई महिलाएं अपने सम्मान के लिए लड़ रहीं हैं। यहां अधिकतर दहेज़ और शारीरिक प्रताड़ना के चलते घरेलू हिंसा अपना रूप ले लेती है। भारत में घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के अनुसार, घरेलू हिंसा के पीड़ित के रूप में महिलाओं के किसी भी वर्ग तथा 18 वर्ष से कम आयु के बालक एवं बालिका को संरक्षित किया गया है।

domestic violence in india

*राष्ट्रीय महिला आयोग (NWC) के मुताबिक लॉकडाउन में तेजी से घरेलू हिंसा के मामले बढ़े थे, जिसे देखते हुए WhatsApp हेल्पलाइन शुरू की गई थी।
*23 मार्च 2020 से लेकर 16 अप्रैल 2020 तक के बीच 239 घरेलू हिंसा के मामले दर्ज हुए थे।
*साथ ही इन दोनों महीनों में प्रतिदिन 9 मामले दर्ज किए जा रहे थे।

Domestic Violence के खिलाफ स्पेन का ‘मास्क 19’

जहां एक और लॉकडाउन के दौरान कई देशों में हेल्पलाइनों पर मदद की बाढ़ आ रही थी, उस दौरान स्पेन ने इस हिंसा से निपटने का अनोखा तरीका तैयार किया था। यहां जो लोग घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराना चाहते थे, वे फार्मेसी में जाकर कोड शब्द ‘मास्क 19’ (What is Spain’s Mask-19) बोल कर फार्मासिस्ट को जानकारी दे सकते थे। जिसके बाद ये शिकायत अधिकारियों तक पहुंची रही थी। जिसकी मदद से कई महिलाओं ने अपनी आवाज को उठाया था।

पुरुषों पर भी घरेलू हिंसा

सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही नहीं बल्कि पुरुष भी इस हिंसा से पीड़ित हैं। हालांकि, इसका आंकड़ा इतना ज्यादा नहीं है लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे पीड़ित कि श्रेणी में नहीं आते। पारिवारिक मसलों को सुलझाने के मकसद से चलाए जा रहे तमाम परामर्श केंद्रों की मानें तो घरेलू हिंसा से संबंधित शिकायतों में करीब चालीस फीसद शिकायतें पुरुषों से संबंधित होती हैं। इनमें पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं और उत्पीड़न करने वाली महिलाएं होती हैं।

पुरुषों के विरुद्ध घरेलू हिंसा के तथ्य पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं है कि महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा एक गंभीर और बड़ी समस्या है, लेकिन कई देशों में पुरुषों के खिलाफ घरेलू हिंसा भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। समाज में पुरुषों का वर्चस्व यह विश्वास दिलाता है कि वे घरेलू हिंसा के प्रति संवेदनशील नहीं हैं।

domestic violence on men

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने पहले ही कर दिया था सचेत

कोरोना के बाद लगे लॉकडाउन में घरेलू हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से भी बयान दिया गया था। जहां महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres ) ने जानकारी साझा करते हुए बताया था कि, घरों में लॉक होने के कारण इस हिंसा में तेजी से वृद्धि हो रही है। साथ ही उन्होंने इस रोकने की भी अपील की थी और देश की सरकारों से सख्त कदम उठाने की बात कही थी। वहीं संयुक्त राष्ट्र महिला विकास कोष (यूनीफ़ेम) के आंकड़ों की मानें तो दुनिया में कहीं भी महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

united nations on domestic violence

AVAILABLE ON

Optimized with PageSpeed Ninja