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109 साल पहले डूबे टाइटैनिक को फिर से बना रहा है चीन
मई 20, 2021 | By - नितिन सिंह भदौरिया

109 साल पहले डूबे टाइटैनिक को फिर से बना रहा है चीन

‘टाइटैनिक’ (Titanic) यानि एक विशाल जहाज जो अपनी दुर्भाग्यपूर्ण पहली यात्रा में एक हिमखण्ड (Iceland)  से टकराकर दो हिस्सों में टूटा और करीब दो घंटे बाद हमेशा के लिए समुद्र की गहराई में समा गया। इतिहास के पन्नों में दर्ज इस हादसे के ठीक 110 साल बाद 2022 में चीन के एक मनोरंजन पार्क में टाइटैनिक-2 (Titanic-2)को समुद्र की गहराइयों से बाहर निकाल फिर से खड़ा किया जा रहा है, जिससे उस शानदार जहाज की यादों को जिंदा रखा जा सके।

कैसे आया टाइटैनिक 2 बनाने का ख्याल

टाइटैनिक फिल्म देखकर आया इसे बनाने का ख्याल

इस परियोजना के मुख्य स्पान्सर रेप्लिका के निवेशक सु शाओजुन (Su Shaojun) ने बताया कि साल 1997 में इसकी कहानी पर बनी एक फिल्म देखकर उन्हें यह ख्याल आया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्‍त हिट रही और यह चीन में भी बेतहाशा लोकप्रिय हुई थी। सू शाओजूं कहते हैं कि उनकी तमन्ना थी की क्यों न 260 मीटर लंबे इस डुप्लीकेट जहाज को बनवाकर असली टाइटैनिक की यादें जिंदा रखी जाएं।

टाइटैनिक के मालिकों ने किया था ये दावा

इस परियोजना में निवेश करने के लिए उन्होंने ऊर्जा उद्योग में स्थित अपनी संपत्ति बेच दी। इसमें कई पनबिजली परियोजनाओं में उनके शेयर भी शामिल थे। गौरतलब है कि यह अपने समय का सबसे बड़ा जहाज था और उसके मालिकों का दावा था कि यह जहाज ‘कभी ना डूबने वाला’ है, लेकिन 1912 में एक हिम-पर्वत से टकराने के बाद टाइटैनिक एटलांटिक महासागर की गहराइयों में समा गया।

इस परियोजना पर खर्च हो चुके हैं करोड़ों

टाइटैनिक की यादों को जिंदा रखना है उद्देश्य

सु कहते हैं, ‘हम टाइटैनिक के लिए एक संग्रहालय बना रहे हैं। इसे बनाने में हमें 6 साल लगे, जो कि मूल टाइटैनिक के निर्माण में लगे समय से ज्‍यादा है। इसे बनाने में 23,000 टन स्टील, 100 से ज्‍यादा वर्कर और एक अरब युआन यानि करीब 15 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा खर्च हो चुके हैं।

सिचुआन प्रांत के जिस मनोरंजन पार्क में इसे रखा गया है वो समुद्र से 1,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है। पार्क के अंदर सॉउथैंप्टन बंदरगाह की नकल का एक बंदरगाह भी बनाया गया है, ठीक वैसा जैसा फिल्म में दिखाया गया था। जहाज तक ले जानी वाली बसों में सेलीन डियोन का गाया हुआ फिल्म का गाना “माई हार्ट विल गो ऑन” लगातार बजता है। इस नकली टाइटैनिक पर एक रात बिताने का खर्च करीब 150 डॉलर है। सू ने बताया कि इस खर्च में अतिथियों को ‘पांच सितारा क्रूज सेवा’ के अलावा एक चालू भाप इंजन की बदौलत बिलकुल समंदर में होने का एहसास होगा।

क्या इस पर आएंगे पर्यटक

टाइटैनिक 2 के बारे में जानकारी सामने आने पर ही यह जहाज कई विवादों में घिर गया है। दरअसल, सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं। लोगों का संदेह है कि पर्यटक इसे देखने आएंगे भी या नहीं, क्योंकि टाइटैनिक को तो दुर्घटना के पर्याय के रूप में याद किया जाता है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यह इस तरह की उन कई चीनी परियोजनाओं में शामिल हो जाएगा जो बाद में बस एक सफेद हाथी बन कर रह गईं। कहा जा रहा है कि इनमें 2008 में बनी अमेरिकी नौसेना के जहाज यूएसएस एंटरप्राइज (USS Enterprise) की नकल शामिल है, जिसे बनाने में 1.8 करोड़ डॉलर खर्च हो गए थे लेकिन उसे पर्यटन के लिए खोलने के कुछ ही दिनों बाद छोड़ दिया गया था।

उद्घाटन में टाइटैनिक फिल्म के किरदार होंगे आमंत्रित

टाइटैनिक फिल्म के किरदारों को मिला निणंत्रण

लोगों के इन संदेहों पर विराम लगाते हुए सू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हर साल करीब 50 लाख लोग उनके जहाज को आएंगे। वहीं सू और उनके सहयोगी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कुछ बड़े नामों का सहारा लेने की भी योजना बना रहे हैं। टाइटैनिक फिल्म के किरदारों का नाम लेते हुए सू ने बताया, “हम जैक, रोज और जेम्स कैमेरॉन को उद्घाटन समारोह में आने के लिए निमंत्रण देना चाहेंगे।

कैसे हुआ था हादसा

हिमखण्ड से टकराकर दो हिस्सों में टूट गया था टाइटैनिक

10 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक ने अपनी यात्रा शुरू की थी। माना जाता है कि टाइटैनिक के डूबने का मुख्य कारण इसकी स्पीड थी। 14 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक को 6 बर्फ की चट्टानों की चेतावनियां मिली थी। टाइटैनिक के कप्तान को लगा कि बर्फ की चट्टान आने पर जहाज मुड़ जाएगा, लेकिन जहाज आकार में बहुत बड़ा था और राडार छोटा, बर्फ की चट्टान आने पर वह अधिक गति के कारण समय पर नहीं मुड़ पाया और चट्टान से जा टकराया। इससे जहाज के आगे के हिस्से में छेद हो गए और उसमें पानी भरने लगा। इसके बाद 2.5 घंटे में जहाज पूरी तरह डूब गया। इस हादसे में 1500 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

टाइटैनिक का मलबा देखने जाएंगे टूरिस्ट

एक अमेरिकी कंपनी ओशियनगेट वैज्ञानिकों और पेईंग गेस्ट्स को वहां ले जाने की तैयारी कर रही है। एक छोटी पनडुब्बी के सहारे रिसर्चरों और मेहमानों को टाइटैनिक के मलबे तक ले जाया जाएगा। टाइटन नाम की पनडुब्बी टाइटैनियम नाम की धातु और बेहद हल्के और अत्यंत मजबूत मैटीरियल कार्बन फाइबर से बनाई गई है। पनडुब्बी में एक पायलट होगा, तीन टूरिस्ट होंगे और एक एक्सपर्ट होगा। पनडुब्बी गोता लगाने के बाद 10 से 12 घंटे समंदर के भीतर गुजारेगी।ओशियनगेट के सीईओ स्टॉकटन रश के मुताबिक 2019 की गर्मियों से टाइटैनिक टूरिज्म की शुरुआत होगी। टाइटैनिक का मलबा देखने के लिए एक सैलानी को 1.05 लाख डॉलर चुकाने होंगे।

टाइटैनिक के बारे में ये फैक्ट्स आपको कोई नहीं बताएगा

  • टाइटैनिक के मलबे का पता पहली बार 1985 में चला।
  • उत्तरी अटलांटिक (North atlantic) में 3,800 मीटर की गहराई में पाया गया टाइटैनिक का मलबा।
  • पानी के भारी दबाव के चलते इतनी गहराई पर खास पनडुब्बियां ही जा सकती हैं।
  • आखिरी बार टाइटैनिक के मलबे तक पहुंचे थे कनाडा की डलहौजी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक।

क्या पानी के अंदर सुरक्षित है टाइटैनिक का मलबा

पानी के अंदर कब तक सुरक्षित रहेगा टाइटैनिक का मलबा

कनाडा की डलहौजी यूनिवर्सिटी (Dalhousie University)के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें टाइटैनिक के मलबे में एक नए किस्म का बैक्टीरिया मिला, जिसे हैलोमोनस टाइटैनिके नाम दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन परिस्थितियों में ज्यादातर जीव जिंदा नहीं रह सकते हैं, उन परिस्थितियों में यह बैक्टीरिया आराम से फलता फूलता है। हैलोमोनस टाइटैनिके नाम के बैक्टीरिया को लोहा खाना बहुत पसंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बैक्टीरिया अगले 20 साल में टाइटैनिक के मलबे को पूरी तरह से चट कर देगा।

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