मोसाद: छोटे से देश की एक ऐसी खुफिया एजेंसी जिससे कांपते हैं दुनियाभर के आतंकी!
मार्च 17, 2021 | By - Abhishek Pandey

मोसाद: छोटे से देश की एक ऐसी खुफिया एजेंसी जिससे कांपते हैं दुनियाभर के आतंकी!

वैसे तो दुनियाभर के देशों की कई खुफिया एजेंसियां (Intelligence Agency) हैं, जिनके नाम आपने सुने होंगे। लेकिन क्या इनके पीछे की कहानी से आप रूबरू हुए हैं? जितना इनके काम रोचक हैं, उतनी ही इन ख़ुफ़िया एजेंसियों (Story Behind Mossad) के पीछे की कहानी है। आप सोचेंगे, हम अचानक ख़ुफ़िया एजेंसियों की जानकारी के बारे में क्यों बात कर कर रहे हैं? तो हालिया मामला मुकेश अम्बानी (Mukesh Ambani) के घर Antilia के पास मिले विस्फोटक से जुड़ा है। जिसमें जैश ए हिन्द (Jaish-e-Hind) का नाम इस्तेमाल कर भारत के सबसे बड़े व्यापारी को धमकी दी गई थी। 

साथ ही साथ इसमें लिखे एक खत में एक नाम भी शामिल था। जिसमें अम्बानी (Mukesh Ambani Antilia case) को धमकी देने से लेकर भारत में इजराइली दूतावास (Israeli Embassy) के बाहर हुए हमले का भी जिक्र था। इसी खत में नाम था मोसाद (Mossad) का, दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी (National Intelligence Agency of Israel), जिसके नाम के चर्चे हर आतंकी के जहन में है। भारत और इजराइल का याराना (India–Israel relations) बेहद पुराना है और भारत की रॉ (RAW) और मोसाद ने साथ मिलकर कई ऑपरेशंस को भी अंजाम दिया है।

आज ख़ुफ़िया एजेंसियों की पहली कड़ी में आप मोसाद के बारे में जानेंगे। इसके साथ ही हम आपके लिए कई ऐसी फिल्मों की लिस्ट भी लाए हैं, जिनके जरिए मोसाद के कुछ कारनामों को बयां किया गया है। यहां आपको मिलेगा मोसाद की हर वो कहानी जो आपको इजराइल की इस ख़ुफ़िया एजेंसी के बारे में कई रोचक तथ्यों से रूबरू करवाएगी। आप यहां जानेंगे कि कैसे मोसाद अपने दुश्मनों का सफाया करती है वो भी उन्हें भनक लगे बिना।

कैसे खड़ी हुई दुनिया की सबसे घातक सुरक्षा एजेंसी मोसाद (Mossad History)

Mossad Logo

 

मोसाद के इतिहास को लेकर बात की जाए तो इसका गठन 13 दिसंबर 1949 को इजराइल (Israel) के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन-गूरियन (David Ben-Gurion) की सलाह पर किया गया था। जिसके पीछे कारण था कि ऐसी केंद्रीय इकाई बनाए जाए जो मौजूदा सुरक्षा-सेना के खुफिया विभाग और विदेश राजनीति विभाग के साथ तालमेल और सहयोग बढ़ाने का कार्य करे। जिसके बाद साल 1951 में मोसाद को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया गया जिससे इसके प्रति सीधे पीएम की जवाबदेही तय की गई। मोसाद का मुख्यालय इजराइल के तेल अवीव (Tel Aviv-Yafo) शहर में स्थित है।

ऐसा माना जाता है कि मोसाद के एजेंट पूरी दुनिया में फैले हैं और दुनिया के किसी भी कोने में छिपे अपने टारगेट को ढूंढकर उसे खत्म कर देना इस एजेंसी के लिए बेहद आसान काम है। मोसाद के एजेंट्स को ट्रेनिंग के दौरान खास तरह से दिल और दिमाग का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वह हर तरह के हथियार चलाने में माहिर हो जाते हैं। वहीं मोसाद में अधिकतर महिला एजेंट शामिल होती हैं, जो अपनी अदाओं के जरिए दुश्मनों को अपने जाल में फंसाती हैं और उनसे राज उगलवा लेती हैं।

भारत की रॉ और मोसाद (Connection Between Mossad And RAW)

भारत की खुफिया एजेंसी रिचर्स एंड एनालिसीस विंग (RAW) और मोसाद के बीच एक गहरा संबंध है। भारत में अपने खुफिया ऑपरेशन्स चलाने के लिए मोसाद दिल्ली (Delhi) में सेफ ठिकाना (Safe House) रखता है, जिसमें उसकी RAW काफी मदद करता है। वहीं जम्मू-कश्मीर (J&K) में सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर हुए हमले के बाद भी मोसाद ने खुफिया बातें निकालने के लिए RAW को तकनीक और ट्रेनिंग देने में मदद की थी।

RAW का गठन साल 1968 में देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। जिसमें उन्होंने रामेश्वर नाथ काव को इसका पहला डायेक्टर नियुक्त किया। वहीं इंदिरा गांधी ने उन्हें उस समय सलाह दी थी कि वह मोसाद के संपर्क में रहें ताकि बेहतर अनुभव और प्रशिक्षण मिल सके। मोसाद अपने खिलाफ बाहर होने वाली आतंकी गतिविधियों को उनके बेस से ही नष्ट करने में महारत रखती है। जिसके चलते RAW को भी पाकिस्तानी आतंकी गतिविधियों से निपटने में काफी मदद मिली। वहीं मोसाद ने भारत को 26/11 और उरी जैसे आतंकी हमले टालने को लेकर खुफिया जानकारी भी साझा की थी।

मोसाद के कारनामे (म्यूनिख) (Munich mossad’s Revenge)

मोसाद के कारनामों (Mossad Operations) को लेकर बात की जाए तो ऐसा कहा जाता है कि वह अपने दुश्मनों को कभी नहीं छो़ड़ती। जिसमें उसका खुदा का कहर मिशन सबसे खतरनाक माना जाता है। साल 1972 में म्यूनिख ओलंपिक (Munich Olympic) में जब आतंकियों ने इजराइल के 11 खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी तो मोसाद ने उनका बदला लेने के लिए लगभग 20 साल लंबा ऑपरेशन चलाकर इसमें शामिल सभी आतंकियों को चुन चुनकर मारा था।

इस ऑपरेशन के दौरान मोसाद एजेंट्स (Mossad Agent’s) ने फोन, बम, नकली पासपोर्ट, उड़ती कारें, जहर की सुई सब का इस्तेमाल किया। वहीं उन्होंने कई देशों के प्रोटोकॉल को भी तोड़ा लेकिन सभी अपराधियों को खत्म करके ही माने। इस ऑपरेशन के दौरान टारगेट के परिवार को मोसाद एक बुके भेजता था। जिसपर लिखा होता था ये याद दिलाने के लिए कि हम ना तो भूलते हैं, ना ही माफ करते हैं।

मोसाद के ऐसे मिशन जिन्होंने सुर्खियां बटोरी (Mossad Operations)

60 के दशक में रूस का मिग-21 लडाकू विमान सबसे उन्नत और तेज था। जिसके इस विमान को पाने में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA तक नाकाम रही थी। फिर इसकी जिम्मदारी मोसाद को मिली और साल 1964 में महिला एजेंट ने एक इराकी पायलट को इस विमान के साथ इजराइल लाने के लिए मना लिया था।

ऑपरेशन एंटेबे (Operation Entebbe) 27 जून 1976 की रात को 11 बजे एयर फ्रांस की एयरबस A300 V4-203 ने इजराइल के शहर तेल अवीव से ग्रीस की राजधानी एथेंस के लिए उड़ान भरी थी। इस विमान में 12 क्रू मेंबर सहित 246 यात्री सवार थे, जिसमें अधिकतर यहूदी और इजराइल के नागरिक थे। जिसके यह विमान आतंकियों के कब्जे में आ गया जो इसे लीबिया के शहर बेंगहाजी ले गए और फिर यूगांडा के एंतेबे हवाई हड़्डे पर पहुंचे। उस समय मोसाद ने अपनी ताकत दिखाते हुए अपने दम पर 94 इजराइली नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। इस ऑपरेशन में इजराइल के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के भाई जोनाथन नेतन्याहू (Jonathan Netanyahu) भी शामिल थे, जिनकी इस घटना के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी।

मोसाद पर बनी फिल्में (Mossad Movies)

मोसाद के मिशन पर अभी तक कई फिल्में देखने को मिली है, जिसमें साल 2005 में स्टीवन स्पिलबर्ग (Steven Spielberg) द्वारा निर्देशित फिल्म Munich, मोसाद के म्यूनिख ओलंपिक (Munich Olympic) में आतंकियों को चुन चुनकर मारने पर बनाई गई है। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफल नहीं रही लेकिन ऑस्कर (Oscar) में इसे 5 श्रेणियों में नॉमिनेट किया गया था साल 2007 में आई Eichmann जर्मनी के पूर्व नाजी लेफ्टिनेंट कर्नल एडोल्फ एचमैन को पकड़ने और उससे पूछताछ के बाद फांसी पर लटकाए जाने तक की कहानी बयां की गई है। Eichmann को साल 1960 में मोसाद ने अर्जेंटीना से गिरफ्तार किया था और फिर उसे 1962 में फांसी दे दी गई थी।

वहीं साल 1987 में आई The Impossible Spy भी मोसाद के एक एजेंट एलि कोहेन की कहानी है जिसे 1960 में खुफिया मिशन के लिए सीरिया की राजधानी दमिश्क भेजा जाता है। एलि कोहेन एक समय सीरिया के उप रक्षा मंत्री बनने वाले थे, लेकिन एन वक्त पर उनका राज खुल जाता है फिर उन्हें फांसी दे दी जाती है। इसके अलावा मोसाद के मिशन को लेकर कई किताबें भी छप चुकी हैं। जिसमें RISE AND KILL FIRST, NO MISSION IS IMPOSSIBLE सहित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इजराइल की किलिंग मशीन को लेकर कई ऐसे मिशन पढ़े जा सकते हैं, जिसमें उन्होंने अपने मिशन को कितनी बहादुरी के साथ अंजाम दिया। इसके अलावा OTT प्लेटफॉर्म पर भी Mossad को लेकर कई डॉक्यूमेंट्री सीरीज भी मौजूद हैं, जिसमें Netflix पर SPY भी शामिल हैं।

बताते चलें कि मोसाद की टीम कभी भी अपने मिशन को जगजाहिर नहीं करती है। इसके एजेंट्स बेहद ख़ुफ़िया तरीके से अपने काम को अंजाम देते हैं। इसके अलावा भी मोसाद से जुड़े कई ऐसे कारनामें हैं जो आए दिन दुनिया की नजर में तो नहीं आते लेकिन मोसाद के सीक्रेट एजेंट इन्हें समय-समय पर अंजाम देते रहते हैं। यह थी मोसाद से जुड़ी कुछ जानकारी लेकिन अगली कड़ी में हम जल्द ही आपसे एक नई जानकारी के जरिए रूबरू होंगे।

जुड़े रहें AlShorts के साथ, अगली कड़ी में हम आपको रूस की खुफिया एजेंसी KGB (Komitet Gosudarstvennoy Bezopasnosti) के बारे में बताएंगे।

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