• calender
कोरोना तो कोरोना अब हाइपोक्सिया ने बढ़ाई डॉक्टर्स की टेंशन
मई 11, 2021 | By - Vaibhav Sharma

कोरोना तो कोरोना अब हाइपोक्सिया ने बढ़ाई डॉक्टर्स की टेंशन

कोरोना महामारी लगभग 1 साल से भी अधिक समय से दुनियाभर में सबसे खतरनाक महामारी साबित हुई है। यह वायरस इतना चालाक है कि यह रूप बदल-बदल कर सामने आ रहा है। ऐसे में इस बार डॉक्टर्स के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो चुकी है। जिसका नाम ‘साइलेंट हाइपोक्सिया’ या ‘हैप्पी हाइपोक्सिया (Happy Hypoxia) है। यह बीमारी बेहद अजीब किस्म की है, इसमें कोरोना के बहुत कम लक्षण या बिना लक्षण वाले युवा मरीजों में ऑक्सीजन का लेवल अचानक तेजी से गिरता है। जिसमें डॉक्टर जब तक मरीज की हालत समझ पाते हैं उसकी मौत हो जाती है। रिपोर्ट्स में सामने आता है मल्टीऑर्गन फेलियर।

इस आर्टिकल में AlShorts आपको इसी भयानक बीमारी से जुड़े तथ्यों से रूबरू करवाएगा।

 

साइलेंट किलर हाइपोक्सिया!

  • दरअसल, यह कोरोना का एक नया प्रकार है। महामारी एक साल से अधिक पुरानी हो गई है। फिर भी नए-नए लक्षण अब भी सामने आ ही रहे हैं।
  • सर्दी, बुखार, खांसी से शुरू होकर यह इन्फेक्शन गंभीर निमोनिया और सांस लेने की समस्या तक पहुंचता है।
  • नए लक्षण हैप्पी हाइपोक्सिया ने विशेषज्ञों को चकित किया है क्योंकि भारत में दूसरी लहर में इन्फेक्टेड ज्यादातर युवाओं को इसका ही सामना करना पड़ा है।
  • हाइपोक्सिया का मतलब है- खून में ऑक्सीजन के स्तर का बहुत कम हो जाना।
  • स्वस्थ व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन 95% या इससे ज्यादा होता है।
  • कोरोना मरीजों में ऑक्सीजन सेचुरेशन घटकर 50% तक पहुंच रहा है।
  • हाइपोक्सिया की वजह से किडनी, दिमाग, दिल और अन्य प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं।
  • कोरोना मरीजों में शुरुआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं दिखता। वह ठीक और ‘हैप्पी’ ही नजर आता है। इसीलिए इसे साइलेंट या हैप्पी हाइपोक्सिया भी कहते हैं।

Happy Hypoxia

शरीर पर कैसे करता है असर

जब हम सांस लेते हैं तो खून के साथ ऑक्सीजन शरीर के हर कोने में जाती रहती है। यह काम फेफड़ों से शुरू होता है, फेफड़े के ऊपर महीन रक्त वाहिनियों का जाल होता है। इस ऑक्सीजन को ही उन रक्त वाहिनियों में एक खास प्रक्रिया द्वारा सोख लिया जाता है। उसके बाद ऑक्सीजन खून के साथ शरीर के हर अंग में पहुंच जाती है। हाइपोक्सिया की स्थिति अक्सर पर्वतारोहियों में देखने को मिलती है। ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन की वजह से यह स्थिति पैदा होती है, हालांकि हैप्पी हाइपोक्सिया वाले कोरोना मरीजों की स्थिति पर्वतारोहियों से अलग होती है। उन्हें सांस लेने में भी कोई दिक्कत भी महसूस नहीं होती है।

युवाओं में होने का कारण

  1. युवाओं की इम्युनिटी मजबूत होती है।
  2. 80% ऑक्सीजन सेचुरेशन पर भी लक्षण महसूस नहीं होते।
  3. आर्थिक तौर पर एक्टिव होने की वजह से इस समय युवा वायरस से ज्यादा इन्फेक्ट हो रहे हैं।
  4. अब भी सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों और कम इम्युनिटी वाले लोगों को ही है।
  5. कोरोना 85% लोगों में माइल्ड, 15% में मॉडरेट और 2% में जानलेवा हो रहा है।
  6. ज्यादातर युवाओं में माइल्ड लक्षण होते हैं, इसलिए अस्पतालों में उन्हें भर्ती करने में देरी हो रही है, इससे उनमें मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है।
  7. फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जाते हैं। इसे ही हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण माना जाता है।

हाइपोक्सिया के लक्षण

  • ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन लेवल कम आना ।
  • हैप्पी हाइपोक्सिया में होंठों का रंग बदलने लगता है।
  • त्वचा भी लाल/बैंगनी होने लगती है।
  • गर्मी ना होने या कसरत ना करने के दौरान भी पसीना आना।
  • माइल्ड लक्षणों को भी नकारे नहीं इलाज जरूर लें।
Optimized with PageSpeed Ninja