कोरोना महामारी और भारत का 72वां गणतंत्र दिवस 2021
जनवरी 26, 2021 | By - Nitin Singh Bhadauriya

कोरोना महामारी और भारत का 72वां गणतंत्र दिवस 2021

‘हम भारत के लोग’ ये मात्र कुछ शब्द नहीं हैं बल्कि शक्ति है, भारत के संविधान की ये एक ऐसी व्यवस्था है जो देश के हर नागरिक को समान अधिकार देती है। 26 जनवरी 2021 को भारतवासी अपने अधिकारों की 72वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। 26 जनवरी 1950 यानि देश में संविधान लागू होने के बाद से ही इस अवसर पर विशेष अतिथि बुलाने की परंपरा शुरू हुई थी, लेकिन इस बार कोरोना से जूझ रहे भारत के सामने इस जश्न को मनाने में कई तरह की चुनौतियां हैं। यही वजह है कि 1966 के बाद ये दूसरा मौका है, जब भारत बिना मुख्य अतिथि के गणतंत्र दिवस मनाएगा।

कौन था पहले गणतंत्र दिवस का मेहमान

भारत में साल 1950 में पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था। 26 जनवरी 1950 को सुबह 10:18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया था। इसके कुछ ही मिनट बाद 10:24 पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और इस अवसर पर इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि बनकर आए थे। इसके बाद 1954 में भूटान के राजा ‘राजा जिग्मे डोरजी’ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

पहली बार पाकिस्तान बना अतिथि

1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद राजपथ पर परेड के पहले अतिथि बनें। वहीं 1958 में चीन के मार्शल ये यिआनयिंग और 1960 में रुस के राष्ट्रपति किल्मेंट वोरोशिलोव मुख्य अतिथि बनें।

गणतंत्र दिवस में शामिल हुईं ब्रिटेन की महारानी

1961 में ब्रिटेन की महारानी रानी एलिज़ाबेथ II गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि बनीं। जबकि 1963 में कम्बोडिया के राजा नोरोडोम सिहानाउक और 1965 में पाकिस्तान के कृषि मंत्री राणा अब्दुल हमिद मुख्य अतिथि बनें। 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद से पाकिस्तान को गणतंत्र की परेड में शामिल होने का आमंत्रण नहीं दिया गया। ये सिलसिला लगातार जारी रहा और 2006 में सऊदी अरब के राजा शाह अब्दुल्ला गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।

पीएम मोदी ने अबू धाबी क्राउन प्रिंस को लिखा खत

2017 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और संयुक्त अरब अमीरात सशस्त्र बलों के उप सर्वोच्च कमांडर एचएच शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अबू धाबी क्राउन प्रिंस को एक खत लिखकर गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का अनुरोध किया था। वहीं क्राउन प्रिंस ने भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में आमंत्रित करने के लिए पीएम मोदी का धन्यवाद अदा किया था। उन्होंने कहा कि ‘हमारे गहरे रिश्ते इतिहास में गहराई से जुड़े हैं। हमारा रणनीतिक सहयोग बढ़ा है और यह विकास की साझा आकांक्षाओं से प्रेरित है। इस दौरे से द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा।

साल 2018 में दस आसियान देशों के प्रमुखों ने गणतंत्र दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। वहीं 2019 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा गणतंत्र दिवस की परेड में मौजूद रहे। 2020 में ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

बता दें कि इस बार ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का आमंत्रित किया गया था और उन्होंने इस आमंत्रण को स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन ब्रिटेन में कोरोना का नया स्ट्रेन मिलने के बाद संक्रमण के मामलों में इजाफा होने लगा। इसके चलते बोरिस जॉनसन ने भारत का दौरा रद्द कर दिया। अब दुनियाभर की नजरें 26 जनवरी यानी भारत के गणतंत्र दिवस समारोह पर बनी हुई हैं कि कोरोना से जन्मी चुनौतियां का सामना करते हुए भारत गणतंत्र दिवस कैसे मनाता है।

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